मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल ने मिलाया डॉ. नीरज अस्पताल से हाथ

सिरसा(प्रैसवार्ता)। मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल, मोहाली ने सिरसा के डॉ. नीरज अस्पताल से हाथ मिला लिया है, जिसकी रविवार को एक पत्रकार वार्ता में घोषणा कर दी गई है। पत्रकार वार्ता में डॉ. मनुज वाधवा और डॉ. नीरज चौधरी ने कहा कि आम तौर पर मानव शरीर में एक कदम बढ़ाने के लिए 200 हड्डीयां और 60 मसल्स को काम करना पड़ता है। हर किसी का ध्यान रखना आसान बात नहीं है। कमजोर हड्डी किसी की भी हो वो किसी भी समय परेशानी खड़ी कर सकती है। फिर वो चाहे प्रोफेशनल हो या फिर कोई आम आदमी। आज के समय में आथराइटिस एक बड़ी परेशानी बन गई है और हमें इसके लिए सतर्क रहना जरूरी है। हर उम्र में और हर मौके पर। हमारे पास 3डी डिजीटल ऑर्थोपेडिक सुइट भी है जिसे हमने जर्मनी की ब्रेन लैब से मंगवाया है। ये एक शानदार तकनीक है लोगो का इलाज करने के लिए। ये हर तरह के बोन, मसल्स और जॉइंट से जुड़ी परेशानियों से निजात दिलाने में हमारी मदद करती है। हम इसी के माध्यम से लोगों को पेनलेस जॉइंट रिपलेस्मेंट, स्टीचलेस सर्जरी और जॉइंट रिपलेसमेंट करके देते हैं और वो भी उम्र भर के लिए। हरियाणा में ओस्थोराइटिस की ज्यादा संभावनाएं देखने को मिलती हैं। यहां के लोग परेशानी को आखिरी स्टेज में लेकर अस्पताल आते हैं और वे जॉइंट रिपलेसमेंट को न कराने के लिए आग्रह करते हैं। लेकिन आखिरी स्टेज में होने के कारण हम ऐसा करने के लिए उन्हें इजाजत नहीं देते। ओस्थोराइटिस होने पर लोगों के जॉइंट्स में दर्द, सूजन आदि देखने को मिलती है और हरियाणा के बुजुर्ग के लोगों में ये खास तौर पर सामने आ रही है। देखने में आया है कि जोड़ों में दर्द होने के कारण लोग चल नहीं पाते लिहाजा उन्हें मोटापे की भी शिकायतें आती हैं। इसके अलावा वे सही ढंग से खाना नहीं खा पाते और न ही वे सूर्य की रौशनी में बैठ पाते हैं।  वहीं स्पोकिंग की भी आदत लोगों में बढ़ रही है। ओस्थोराइटिस आज महिलाओं में भी आम हो गई है। इसका कारण ये है कि पोस्टमेनोपॉज वुमेंस कर हड्डीयां पुरुषों के मुकाबले ज्यादा कमजोर होती हैं और इसे ओस्टीओपोरोसिस कहा जाता है। इसे पारोस बोन्स के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर कई गणमान्य मौजूद थे।

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