जनता परिवार : सवारी से पूर्व ही साईकिल हुआ पैंचर

सिरसा(प्रैसवार्ता)। भाजपाई शासन का विरोध करने के साथ साथ अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाए रखने के लिए आधा दर्जन राजनीतिक दलों का जनता परिवार में विलय पर ग्रहण लग गया है और संभावित चुनाव चिन्ह साईकिल पैंचर हो गया है। देशवासियों ने आजादी से लेकर अब तक अनेक पार्टियों के जन्म लेने और उनके गर्भपात को देखा है।  इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पांच राज्यों में प्रभावी प्रभाव रखने वाले राजनीतिक  दलों ने जनता परिवार के बैनर तले एक मंच पर एकत्रित होने की योजना तो बनाई, मगर यह योजना गर्भपात की चपेट में आती नजर दिखाई दे रही है। भाजपाई शासन के विरोध के लिए जनता दल (यू) के प्रधान शरद यादव, समाजवादी के मुलायम सिंह यादव, इनैलो के ओम प्र्रकाश चौटाला, जनता दल (एस) के एचडी देवगौड़ा पूर्व प्रधानमंत्री, जनता दल (यू) के नीतिश कुमार तथा समता पार्टी के कमल मोरारका ने विलय की घोषणा तो कर दी, मगर घोषणा को अमलीजामा पहनाना इतना आसान नहीं है, क्योंकि सभी की अलग-अलग डफली बज रही है। लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में मतदाताओं द्वारा दिखाए गए आईने से कई क्षेत्रीय दलों पर संकट के बादल मंडराने के चलते अपना अस्तित्व बचाने के लिए एक प्रयास किया गया है, जो सफल होता दिखाई नहीं दे रहा। कई पार्टियों व कई चुनाव चिन्हों पर चुनाव लड़ चुकी इनैलो पिछले 17 वर्ष से चश्मे ुचुनाव चिन्ह को लेकर राजनीति कर रही है। इनैलो का एक बड़ा वर्ग विलय का विरोध कर रहा है। देश के राजनीतिक मानचित्र पर नजर दौड़ाने से पता चलता है कि राजसी दिग्गज सत्ता सुख भोगने के लिए हृदय परिवर्तन से परहेज नहीं करते। जनता परिवार को लेकर देशवासियों की नजरें जनता द्वारा दर किनार किए गए राजसी दिग्गजों पर टिक गई है। जनता परिवार का भविष्य क्या रहेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, मगर मौजूदा स्थिति में जनता परिवार में बिखराव नजर आ रहा है। देश में इससे पूर्व भी कई बार तीसरा मोर्चा बनाने के प्रयास किए जा चुके है, मगर सफलता नहीं मिली।

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