जनता परिवार विलय पर लग सकता है ग्रहण

सिरसा(प्रैसवार्ता)। जनता से दूरी बनाने वाले करीब आधा दर्जन राजनीतिक दलों द्वारा जनता परिवार के रूप में तीसरी राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरने का प्रयास पर ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। चुनाव चिन्ह और पार्टी के नाम पर सहमति का न बनना, बिहार में सीटों को लेकर हो रही रस्साकसी ने जनता परिवार की तस्वीर स्पष्ट कर दी है, क्योंकि पिछले दो सप्ताह से जनता परिवार की संभावित बैठकें स्थगित हो रही है। विलय को लेकर कड़ा विरोध समाजवादी पार्टी की तरफ से हो रहा है कि जनता परिवार में पार्टी का विलय न किया जाए। प्रैसवार्ता को एक संविधान विशेषज्ञ एमपी शर्मा ने बताया कि पार्टी सविधान मुताबिक दल का नाम और चिन्ह नहीं बदला जा सकता, इसलिए जनता परिवार को राष्ट्रीय स्वरूप मिलना असंभव है। ऐसी स्थिति में अपनी पार्टी और चुनाव चिन्ह का प्रयोग न करने वाले राजनीतिक दल विलय को लेकर पर्शोकश में है। निकट भविष्य में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भी जनता परिवार में सीट वितरण को लेकर कोई शुभ संकेत नजर नहीं आ रहा। चर्चा तो यह भी है कि विलय के पक्षधर समाजवादी पार्टी की मदद से राज्यसभा में पहुंचने और दिल्ली में सरकारी कोठी की फिराक में है, जिसका समाजवादी पार्टी का एक बड़ा वर्ग विरोध कर रहा है। 

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