अधूरे गर्भपात मामले में महिला चिकित्सक शकुंतला चौधरी के खिलाफ एएसपी ने दिए जांच के आदेश

सिरसा(प्रैसवार्ता)। महिला चिकित्सक शकुंतला चौधरी द्वारा विवाहिता के ईलाज में गंभीर लापरवाही बरत कर उसकी जान जोखिम में डालने के मामले में पीडि़त परिवार 5 वर्षों से न्याय के लिए भटक रहा है। पुलिस द्वारा इस दिशा में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। पीडि़त परिवार ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतीक्षा गोदारा से मुलाकात कर उन्हें अपनी व्यथा सुनाई। ए.एस.पी. ने पीडि़त परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया। उन्होंने शहर थाना प्रभारी को इस मामले की गंभीरता से जांच कर उचित कार्रवाई कर रिपोर्ट देने के आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश की पालना करते हुए थाना प्रभारी ने जांच शुरु करवा दी है। ए.एस.पी. प्रतीक्षा गोदारा को दिए ज्ञापन में सुरतगढिय़ा बाजार निवासी राम मुंदड़ा ने बताया कि वर्ष 2010 की 31 अगस्त को उसकी धर्मपत्नी सोनिका के गर्भ में मृत बच्चा होने की अल्ट्रासाऊंड रिपोर्ट के बाद जनता भवन रोड स्थित चौधरी नॢसंग होम की संचालिका डा. शंकुतला चौधरी ने गर्भपात किया, लेकिन मृत बच्चे के अंग गर्भ में ही छोड़ दिए। अधूरे गर्भपात के कारण सोनिका के शरीर में जहर फैलना शुरु हो गया और उसकी जान का खतरा पैदा हो गया। प्रार्थी ने बताया कि डा. शकुंतला चौधरी के पास कई बार चक्कर काटने के बावजूद उन्होंने इसे सामान्य बात बताया, लेकिन कोई उपचार करना जरुरी नहीं समझा। 29 अक्तूबर 2010 को अन्य चिकित्सक संतोष बिश्रोई से चैकअप करवाने पर सोनिका के गर्भ में मृत बच्चे के अंग होने का पता चला तो डा. संतोष ने आप्रेशन किया, जिससे सोनिका की जान बच पाई। प्रार्थी राम मुंदड़ा ने बताया कि डा. शकुंतला चौधरी की गंभीर लापरवाही के चलते उनकी पत्नी को घोर शारीरिक व मानसिक प्रताडऩा से गुजरना पड़ा। ईलाज में लाखों रुपए खर्च होने से आॢथक मार भी पड़ी। प्रार्थी ने ए.एस.पी. को दिए ज्ञापन में मांग की कि डा. शकुंतला चौधरी के खिलाफ फौजदारी मुकदमा दायर किया जाए और मरीज की ङ्क्षजदगी से खिलवाड़ करने पर उनकी डिग्री कैंसल कर सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए। शहर थाना प्रभारी सुभाष ने ए.एस.पी. प्रतीक्षा गोदारा के आदेश पर थाना कर्मचारी सतीश को जांच शुरु करने के निर्देश दिए हैं। सतीश ने राम मुंदड़ा के बयान कलमबद्ध कर लिए हैं। 

No comments