गली ब्रह्माकुमारी आश्रम के फर्जी निर्माण का मामला: धारा 406, 409, 420, 465, 466, 467, 471 व 120 के तहत मामला दर्ज

सिरसा(प्रैसवार्ता)। बरनाला रोड स्थित गली ब्रह्माकुमारी आश्रम के फर्जी निर्माण व फर्जी मानिटरिंग मामले में भ्रष्ट अधिकारियों व ठेकेदार की गर्दना नपना अब तय हो गया है। शहर पुलिस ने फर्जी गली निर्माण के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 409, 420, 465, 466, 467, 471 व 120 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। नागरिक परिषद की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इस मामले में नगर परिषद के ठेकेदार उमेश गुप्ता, जेई अरुण कुमार, एमई सुबेग सिंह, ईओ बीएन भारती के अलावा पंचायतीराज विभाग के कार्यकारी अभियंता धर्मवीर दहिया की खैर नहीं है। 
उल्लेखनीय है कि नगर परिषद के भ्रष्ट अधिकारियों ने लाखों रुपये का गबन करने के लिए ब्रह्माकुमारी आश्रम वाली गली का फर्जी निर्माण कर डाला था। गली का निर्माण ठेकेदार उमेश गुप्ता द्वारा दर्शाया गया जबकि जेई अरुण कुमार ने गली निर्माण की एमबी में इंद्राज किया। एमई सुबेग सिंह ने गली निर्माण की देखरेख दर्शाई। तत्कालीन ईओ बीएन भारती ने बिल को ओके करार दिया। इस गली की बाकायदा मानिटरिंग कराई गई। पंचायतीराज विभाग के कार्यकारी अभियंता धर्मवीर दहिया ने गली ब्रह्माकुमारी आश्रम का निर्माण दर्शा दिया। उन्होंने नगराधीश के साथ गली की मानिटरिंग करने की बात की। जबकि इस गली का निर्माण पिछले दस वर्षों में नहीं हुआ है। 
नगर परिषद के अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों के साथ मिलकर करोड़ों रुपये की ठगी की है। बिना गली का निर्माण किए ही फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकार को चूना लगाने की तैयारी की गई थी । मीडिया द्वारा मामला उजागर करने के बाद इस मामले को प्रलोभन द्वारा दबाने की हरसंभव कोशिश की गई थी। नागरिक परिषद ने नगर परिषद के इस भ्रष्टाचार की शिकायत सीएम विंडो पर की। मामले में पुलिस अधीक्षक द्वारा एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए। जिस पर शहर पुलिस ने गली का फर्जी निर्माण करने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, षड्यंत्र रचने के आरोप में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 
एएसपी करेंगी जांच
गली का फर्जी निर्माण करने मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतीक्षा गोदारा को सौंपी गई है। तेज तर्रार युवा पुलिस अधिकारी के हाथों में जांच की कमान पहुंचने के बाद इस मामले से जुड़े भ्रष्ट अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। गली ब्रह्माकुमारी आश्रम वाली के निर्माण मामले में वैसे तो सारे तथ्य सार्वजनिक हैं क्योंकि गली का निर्माण किया ही नहीं गया है और ठेकेदार, जेई, एमई, ईओ द्वारा गली के बिल का भुगतान करने तथा पंचायतीराज विभाग के कार्यकारी अभियंता द्वारा फर्जी मानिटरिंग किया जाना सामने आ चुका है। ऐसे में नगर परिषद के भ्रष्ट अधिकारियों की खाल बचना मुश्किल है। 

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