हरियाणा में भाजपा भी चली कांग्रेसी तर्ज पर, गुटबंदी की चपेट में

सिरसा(मनमोहित ग्रोवर)। पहली बार अपने बलबूते पर हरियाणा में सत्ता संभालने वाली भाजपा कांग्रेस की तर्ज पर चल पड़ी है और इसमें गुटबंदी भी बढऩे लगी है। कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मौजूदा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर में आंख मिचौली चल रही है, तो भाजपा में सांसद एवं केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह तथा सांसद अश्विनी चौपड़ा मौजूदा भाजपाई मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को आंखे दिखा रहे है। वीेरेंद्र सिंह एक लंबे समय से मुख्यमंत्री का स्वपन पाले हुए है, जबकि चौपड़ा हरियाणा में पंजाबी समुदाय की कमान संभालने के लिए तड़प रहे है। वीरेंद्र सिंह और चौपड़ा मुख्यमंत्री खट्टर को निशाने पर रखकर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से गुरेज नहीं करते। वीरेंद्र सिंह कांग्रेस से अलविदाई लेकर भाजपा में शामिल होकर मुख्यमंत्री बनने का स्वपन लिए हुए थे, जिस पर ग्रहण लग गया और ट्रेजिडी किंग एक बार फिर ट्रेजिडी की चपेट में आ गए। वीरेंद्र्र सिंह का अफसरशाही के हावी होने की टिप्पणी तथा चौपड़ा द्वारा खट्टर टीम को भ्रष्ट प्रमाण पत्र देने उपरांत भी भाजपाई शीर्ष नेतृत्व द्वारा कोई संज्ञान न लेने से खट्टर के हौसले बुलंद है, मगर अपने ही विरोधियों का आंकड़ा बढ़ा रहे है। भाजपा के प्रांतीय प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला पार्टी अनुशासन तोडऩे वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठा रहे है, वहीं भाजपा की राष्ट्रीय अनुशासन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सिरसा के पूर्व विधायक प्रौ. गणेशी लाल स्वयं सकते में है, क्योंकि खट्टर सरकार ने उनकी योग्यता और अनुभव को दर किनार कर जगदीश चौपड़ा को अपना राजनीतिक सलाहकार नियुक्त कर भाजपा में गुटबाजी को जन्म दे दिया है। भाजपा शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि पार्टी दिग्गज सार्वजनिक टिप्पणी करने की बजाए पार्टी मंच पर बात करें, मगर वीरेंद्र सिंह स्पष्ट कर चुकेे है कि पार्टी मंच पर सुनवाई न हो, तो सच्चाई सामने कैसे लाए। वीरेंद्र सिंह की तरह चौपड़ा भी पंजाबी समाज की सीढ़ी चढ़कर हरियाणा के मुख्यमंत्री का ख्वाब पिरोये हुए है और कई बैठके भी पंजाबी एकता को लेकर कर चुके है। प्रदेश में एक तिहाई जनसंख्या पंजाबी वर्ग की है। हरियाणा में कांग्रेस की तरह भाजपा में भी गुटबंदी की खिचड़ी पक रही है। कांग्रेस को हरियाणवी मतदाताओं ने तीसरे नंबर पर पहुंचा दिया है, वहीं दूसरे नंबर पर इनैलो चुप्पी साधे हुए है। भाजपा में गुटबंदी के पनप रहे प्र्रयास शुभ संकेत नहीं कहे जा सकते। भाजपा इस बात से उत्साहित है कि इनैलो चुप्पी साधे हुए है, जबकि कांग्रेस में दाल जूतियों में बंट रही है, मगर भाजपा शायद यह भूल गई है कि भाजपा में दाल ही नहीं खिचड़ी पकनी शुरू हो गई है।

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