अफसरशाही बन सकती है खट्टर सरकार के लिए मुसीबत - The Pressvarta Trust

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Wednesday, June 17, 2015

अफसरशाही बन सकती है खट्टर सरकार के लिए मुसीबत

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा में प्रथम बार अपने बलबूते पर स्पष्ट बहुमत लेकर सत्ता में आई भाजपा सरकार अफसरशाही के च्रकव्यूह में फंस कर रह गई है, जिनके चलते भाजपाई दिग्गज परेशान है, क्योंकि पार्टी की सरकार होने के बावजूद भी अफसरशाही तव्वजों नहीं देती, जिसका खामियाजा भाजपा को निकट भविष्य में होने वाले निकाय चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में जनता से, जो वायदे किए थे, उन्हें पूरा करने में अफसरशाही बाधक बन रही है। प्रशासनिक स्तर पर भाजपा का कोई कैडर हरियाणा में नहीं, इसलिए कांग्रेस और इनैलो के प्रति निष्ठावान अफसरशाही से काम चलाया जा रहा है। भाजपाई शासन में भाजपाई अपने काम करवाने के लिए भटक रहे है, जबकि इनैलो और कांग्रेसी नेताओं के धडल्ले से काम हो रहे है। भाजपा ने आरंभिक दौर में अफसरशाही को इधर-उधर करने का अभियान तो शुरू कर रखा है, मगर भाजपा के प्रति निष्ठा रखने वालों की कमी खल रही है। कई अधिकारी तो भाजपाई दिग्गजों के काम करना तो दूर की बात, फोन तक नहीं सुनते। अफसरशाही की इस कार्यप्रणाली का रोना भाजपाई अनेक बार शीर्ष नेतृत्व के समक्ष रो चुके है, मगर उनकी कोई सुनवाई नहीं होने से वह इस स्थिति में पहुंच गए कि न तो अफसरशाही तवज्जों देती है और न ही शीर्ष नेतृत्व। इसी परेशानी के चलते भाजपाई दिग्गज लोगों से मिलने से कतराने लगे है, जबकि हरियाणवी मतदाताओं के उस ख्वाब को ग्रहण लग गया है, जिसे लेकर उन्होंने भाजपा को सत्ता सौंपी है। प्रदेश की कानूनी व्यवस्था बद से बदतर हो गई है। अफसरशाही बेलगाम है, कर्मचारी, किसान, मजूदर व व्यापारी सड़कों पर है। कर्मचारियों ने नौकरियां छीनी जा रही है, तो किसानों को यूरिया खाद, मुआवजे में घपलेबाजी, गन्ने के भुगतान में विलम्ब, भूमि अधिग्रहण मामले को लेकर भाजपा से हरियाणवी मतदाताओं का विश्वास निरंतर कम हो रहा है। भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने का दावा करने वाली खट्टर सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के दाम बढ़ गए है। वायदों को छोड़कर भाजपाई लच्छेदार भाषण देकर प्रदेशवासी का ध्यान इधर-उधर करने में जुट गए है और वायदे हवा-हवाई हो गए है, जिसे लेकर जनता के साथ-साथ भाजपाई भी चिंतित है और यहीं चिंता भाजपाईयों को भाजपाई शासन के विरोध में उठने को लेकर मजबूर कर रही है। समय रहते हुए भाजपा ने यदि अफसरशाही की सोच और प्रणाली में बदलाव न लाया, तो आने वाले समय में भाजपा के लिए अफसरशाही एक मुसीबत पैदा कर सकती है।

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