अशोक तंवर व भूपेंद्र सिंह हुड्डा को लेकर कांग्रेस हाईकमान चिंतित

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा कांग्रेस के प्रधान एवं सिरसा संसदीय क्षेत्र से सांसद रह चुके अशोक तंवर ने प्रदेश कार्यकारिणी का शीघ्र गठन करने का शोशा छोडकर प्रांतीय कांग्रेस में हलचल मचा दी है और पदाधिकारी बनने के इच्छुक तंवर के खेमे में तालमेल बढ़ाने में जुट गए है। प्रदेश में कांग्रेस दो गुटों में बंटी हुई है और दोनो ही एक दूसरे पर जड़े खोदने से परहेज नहीं करते। कार्यकारिणी का गठन होने से कांग्रेसीजनों का उत्साह ठंडा पड़ा हुआ है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की सोच है कि दोनो गुट एक मंच पर एकत्रित होकर पार्टी हित में काम करें, मगर ऐसा नहीं होने पर कांग्रेस हाईकमान चिंतित है। स्थिति यह है कि कांग्रेसीजन तंवर और हुड्डा की डुगडुगी में उलझ कर रह गए है। हुड्डा एक दशक तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे है और इसी दौरान उन्होंने अपना नेटवर्क तैयार कर लिया है, जो एक मजबूत पकड़ बना चुका है। मजबूत पकड़ और प्रभावी जनाधार का आइना हुड्डा तीन बार शक्ति प्रदर्शन करके हाईकमान को दिखा चुके है। तंवर समर्थक इसलिए परेशान है कि उन्हें भी हुड्डा का विरोध करना पड़ रहा है, जिसका वह तंवर के साथ गुणगान करते रहे है। सत्ता के बदलते ही तंवर और हुड्डा के रास्ते बदल गए है और मतभेदों में निरंतर इजाफा हो रहा है। हुड्डा, जहां 15 मौजूदा विधायकों को साथ लिए हुए है, वहीं तंवर को राहुल गांधी का करीबी होने का लाभ मिल रहा है। कांग्रेसी दिग्गज कैप्टन अजय सिंह, सांसद सुश्री शैलजा तथा कांग्रेस विधायक की दल की नेता किरण चौधरी के भी हुड्डा से राजनीतिक मतभेद देखे जा रहे है। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व,ज्यों-ज्यों दोनो गुटों में ब्यानबाजी से परहेज करने की सलाह देता है, त्यों-त्यों बयानबाजी बढ़ जाती है। दिल्ली की किसान रैली में गुलाबी पगड़ी से कांग्रेस आलाकमान हुड्डा के प्रभाव के मानता है, जिसके चलते हुड्डा की अनदेखी कांग्रेस पर भारी पड़ सकती है। तंवर की राहुल गांधी से नजदीकी तथा हुड्डा का जनाधार कांग्रेस की नई कार्यकारिणी को  लेकर बाधक बना हुआ है, क्योंकि कांग्रेस हाईकमान दोनो में से किसी को भी नहीं खोना चाहता। सूत्रों की मानें तो दोनो गुटों को संतुष्ट करनेे के लिए कांग्रेस ने नई कार्यकारिणी के गठन की तैयारी कर ली है, जिसकी कभी भी घोषणा की जा सकती है। ऐसा माना जा रहा है कि पद की जिम्मेवारी मिलते ही प्रदेश में कांग्रेस को तीव्र गति देने के लिए कांग्रेस दिग्गज सक्रिय हो सकते है, क्योंकि प्रमुख विपक्षी दल इनैलो अभी कोप भवन से बाहर नहीं निकला है। मौजूदा सरकार की कमियों पर सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस ही सक्षम नजर आ रही है। पार्टी हाईकमान पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल व बंसीलाल द्वारा ली गई अलविदाई को भी गंभीरता से देखते हुए कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहते है, मगर देखना तो यह होगा कि आलाकमान के निर्देश पर गठित कार्यकारिणी में हुड्डा या तंवर में किसकी टीम को प्राथमिकता मिलती है।

No comments