मुख्यमंत्री खट्टर के ओएसडी के बढ़ते आंकड़े से भाजपाई दिग्गज सकते में

सिरसा(प्रैसवार्ता)। मुख्यमंत्री हरियाणा मनोहर लाल खट्टर के बढ़ते ओएसडी आंकडे से खफा भाजपाई दिग्गज खट्टर विरोधी मंच पर एकजुट होने की तैयारी में है, जिससे खट्टर भी वाकिफ है और वह भी विरोधी मंच को झटका देने के लिए किसी भी क्षण मंत्रीमंडल का विस्तार, निगमों के चेयरमैनों की नियुक्ति तथा आधा दर्जन मुख्य संसदीय सचिव बना सकते है। भाजपा द्वारा हमेशा मुख्य संसदीय सचिवों का विरोध किया जाता रहा है। कांग्रेसी शासन में तो इस मामले को लेकर भाजपा अदालत में भी दस्तक दे चुकी है, मगर विधायकों के बढ़ते दवाब के चलते मुख्य संसदीय सचिव बनाने को लेकर गंभीर है। हरियाणा में मौजूदा खट्टर सरकार में 10 मंत्री है। कैबिनेट विस्तार के साथ 20 बोर्डों, निगमों, कारपोरेशन के चेयरमैन, उप चेयरमैन तथा चार हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन के सदस्य बनाए जाने की चर्चा है। मंत्रीमंडल में चार मंत्री पद रिक्त है, मगर दो ही बनाए जाने की संभावना है, जिसमें जिले, वर्ग और समुदाय के प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए जाने की कवायद चल रही है। खट्टर सरकार एक सदस्य अनुसूचित जाति और एक वैश्य समुदाय को लालबत्ती वाली गाड़ी सौंपकर मंत्री पद दे सकती है। खट्टर सरकार महिला, अल्प संख्यक और प्रतिनिधित्व विहीन जिलो को मुख्य संसदीय सचिव देने पर भी तैयारी कर रही है। ओएसडी के बढ़ते आंकड़े और उन्हें दी जाने वाली सुविधाएं भाजपाई दिग्गजों को रास नहीं आ रही। केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह, सांंसद अश्विनी चौपड़ा न सिर्फ खट्टर सरकार पर टिप्पणी कर चुके है, बल्कि अपना अलग गुट बना रहे है, ताकि भाजपा आलाकमान पर मुख्यमंत्री बदलने का दवाब बनाया जा सके। इसके लिए मुलाकात सिलसिला भी शुरू हो चुका है। सांसद और विधायकों की शिकायतों का अफसरशाही ध्यान नहीं देती, जिस कारण भाजपाई दिग्गज भाजपाई शासन होते हुए भी घुट-घुट कर सांस लेने पर मजबूर है। खट्टर की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ-साथ राष्ट्रीय सेवक संघ से पैठ विरोधियों के स्वप्रों पर ग्रहण लगाए हुए है। भाजपा में खट्टर विरोधी मंच तैयार होना शुरू हो गया है। यह मंच क्या करिश्मा दिखाएगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, मगर समय रहते हुए खफा भाजपाई दिग्गजों की सुध न ली गई, तो खट्टर सरकार के लिए एक बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।

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