सिरसा में चौधर के चक्कर में नहीं हो रहा धर्मशाला का निर्माण - The Pressvarta Trust

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Wednesday, July 1, 2015

सिरसा में चौधर के चक्कर में नहीं हो रहा धर्मशाला का निर्माण

सिरसा। परशुराम चौक पर श्री अग्रवाल सेवा सदन की स्थापना के लिए सरकार ने दिल खोलकर दान दिया, लेकिन समाज के लोगों की दकियानूसरी सोच के चलते 5 साल के लंबे समय में इस सदन के नाम पर शिलान्यास पत्थर के अलावा कुछ नहीं लग पाया। इसी तरह से अरोड़वंश धर्मशाला का निर्माण कार्य भी अटका पड़ा है। श्री अग्रवाल सेवा सदन के निर्माण की राह में रोड़ा सिर्फ चौधराहट का है। अग्रवाल समाज की एक लंबे समय से मांग थी कि अग्रवाल समुदाय के लिए सामाजिक कार्यों या वैवाहिकों समारोहों के लिए अपना स्थान होना चाहिए। इसकी मांग समाज के प्रबुद्ध और गणमान्य लोगों ने तत्कालीन मंत्री से की थी। यह बात तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हु्ड्डा तक पहुंची, तो उन्होंने इसके लिए हां भर दी और बीडीओ कार्यालय की जमीन को अग्रवाल समाज और अरोड़वंश के लिए दान दे दी। इस जमीन में 2400 गज एरिया श्री अग्रवाल सेवा सदन के लिए मिला, जिसकी रजिस्ट्री भी समाजसेवियों ने करवा दी। इस सदन के निर्माण के लिए लाखों रूपए चंदा भी एकत्रित किया गया, मगर चौधर रास्ते में आ गई और सदर का निर्माण अधर में लटक गया।। आज तक यह जमीन उसी तरह पड़ी हुई है। इस पर शिलान्यास पत्थर के अलावा और कुछ निर्माण कार्य नहीं हो सका।
अग्रसैन जयंति तक सीमित है अग्रवाल
सिरसा में अग्रवाल समाज काफी सृमद्ध है और दान-पुण्यों के कार्यों में उनक अग्रणी भूमिका रही है। मगर समाज के उत्थान के लिए कोई बात आए, तो उनमें चौधर की जंग शुरू हो जाता है। अग्रवाल समाज सिर्फ अग्रसैन जयंति मनाने तक सीमित है और इसके अलावा किसी अन्य समाजिक कार्यों में उनका दखल बिलकुल नहीं है। सिरसा में होने वाले अन्य सामाजिक कार्यों में अगर अग्रवाल समाज की भूमिका देखी जाए, तो यह नगण्य और शर्मनाक स्तर पर खड़ी है। हजारों की संख्या में अग्रवाल समाज सिरसा में अपना वजूद रखता है। इनमें से बहुत सारे तो इतने समृद्ध है कि एक व्यक्ति की भी चाहें तो धर्मशाला का निर्माण करवा सकता है। सामाजिक कार्यों में सभी की भूमिका व सहयोग होना चाहिए, मगर यह दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि इतने समृद्ध समाज की शहर में अपनी कोई धर्मशाला नहीं है।
बाकी समुदायों की हैं धर्मशालाएं
मजे की बात यह है कि जिन लोगों को काफी वंचित व गरीब समझा जाता है, उनकी भी अपनी धर्मशालाएं काफी अच्छी हालत में है और बढिय़ा चल रही है। मसलन सैनी समाज की धर्मशाला जड़वाला मौहल्ले में, ब्राह्मण समाज की धर्मशाला बेगू रोड़  पर, कंबोज समाज की धर्मशाला आईटीआई रोड़ पर, कबीर धर्मशाला शिव चौक पर, कुम्हार धर्मशाला आईटीआई रोड़ पर, अंबेडकर भवन बेगू रोड़ पर बना हुआ है। दुर्भाग्य की बात यह है कि कन्याओं के सामूहिक विवाह करवाने, हजारों लोगों के लिए लंगर-भंडारे की व्यवस्था करवाने और दान दक्षिणा में अपना महत्वपूर्ण योगदान रखने वाले वैश्य समाज के लोग अपने के लिए अदद धर्मशाला का निर्माण करवाने में पीछे हट रहे है।(साभार)

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