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Saturday, July 18, 2015

अनुभवहीनता, जनविरोधी निर्णय, बिगड़ती कानून व्यवस्था खट्टर पर पड़ सकती है भारी

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा के बदलते राजनीतिक मानचित्र, बेलगाम अफसरशाही, बिगड़ती कानून व्यवस्था, कर्मचारी वर्ग में पनपता रोष, जनविरोधी निर्णय मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अनुभवहीनता के चलते मुख्यमंत्री पद की कुर्सी पर ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। निकाय चुनावों के परिणामों द्वारा दिखाए गए आईने के चलते खट्टर की विदाई लगभग तय मानी जा रही है। प्रदेश की भाजपा सरकार से कार्यकर्ता तो रूष्ट है, मगर विधायक तक भी अपना रोना शीर्ष नेतृत्व के समक्ष रो चुके है। राज्य की अफसरशाही बेलगाम है, कानूून व्यवस्था निरंतर बिगड़ रही है, कर्मचारी सड़कों पर है और चारों तरफ ऐसा माहौल बन चुका है कि प्रदेशवासी भाजपाई सरकार बनाकर पछताने लगे है। खट्टर सरकार की कार्यप्रणाली की असली तस्वीर निकाय चुनाव उपरांत स्पष्ट होगी, क्योंकि निकाय चुनाव से भाजपा कार्यकर्ता व दिग्गज दूरी बनाने पर मजबूर रहेंगे। मुख्यमंत्री को प्र्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का, जहां खुला समर्थन है, वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह खट्टर की कार्यप्रणाली से खफा है और यहीं खफा उनकी विदाई का प्रमुख कारण बन सकती है। अमित शाह द्वारा महासंपर्क अभियान को लेकर दिल्ली में बुलाई गई बैठक में खट्टर की अनुपस्थिति को लेकर शीर्ष नेतृत्व नाराज बताया जा रहा है। खट्टर को कमजोर क्षमता, सरकार की कई मोर्चों पर विफलता से भाजपा की छवि खराब हो रही है। केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह, सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, भाजपाई सांसद, विधायक, दिग्गज व कार्यकर्ता खट्टर सरकार के कामकाज को लेकर खुश नहीं है। बताया जा रहा है कि अमित शाह की रविवार को हुई बैठक में खट्टर नहीं पहुंचे, जबकि शनिवार रात्रि को वह दिल्ली में ही थे। खट्टर की सिफारिश पर पार्टी प्रधान बने सुभाष बराला की अमित शाह ने क्लास लगाई और उनसे सदस्यता अभियान का विवरण मांगा। यह बैठक पार्टी प्रचार, सदस्यता अभियान से कहीं ज्यादा खट्टर सरकार को लेकर हुई, जिसमें सरकार के कामकाज और मंत्री-संंतरी, दिग्गजों की अनदेखी पर खुलकर आक्रोश जताया गया। अमित शाह और खट्टर के बीच बढ़ रही कड़वाहट कभी भी खट्टर के स्थान पर हरियाणवासियों को मुख्यमंत्री के रूप में नया चेहरा दे सकती है। खट्टर की मुख्यमंत्री पद से अलविदाई को लेकर भाजपा का एक बड़ा वर्ग सक्रिय है, जिससे विधायकों, दिग्गजों व प्रभावी भाजपईयों का भी समर्थन मिल रहा है। सट्टेबाजों ने निकाय चुनाव उपरांत खट्टर सरकार की अलविदाई को लेकर सट्टेबाजी शुरू कर दी हैै।

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