शहर में चर्चा: मुख्यमंत्री साहब, आप एक बार आ जाते तो पत्रकारों की भूख हड़ताल ही खत्म हो जाती!

सिरसा(प्रैसवार्ता)। नगर परिषद के भ्रष्ट अधिकारियों को लेकर सिटी थाना के बाहर बैठे पत्रकारों व संस्थाओं की भूख हड़ताल जारी है। इसी बीच शहर में एक बार फिर चर्चाओं शुरू हो गई है। लोगों में चर्चा है कि आखिरकार पत्रकारों का काम भूख हडताल करना नहीं होता, लेकिन अगर पत्रकार हड़ताल कर रहे है, तो उन्हें समर्थन मिलना चाहिए। क्योंकि यह समस्या एक व्यक्ति की नहीं पूरे सिरसा वासियों की है। चर्चा यह भी है कि सीएम जी सिरसा आए थेे, घोषणाओं भी करके गए है, प्रैस कांफ्रेंस भी कर गए है, तो क्या 2 मिनट वे भूख हड़ताल पर बैठे इन पत्रकारों से नहीं मिल सकते थे, अगर एक बार मिलने आ जाते तो शायद सीएम के आश्वासन के बाद पत्रकारों की भूख हड़ताल ही खत्म हो जाती! खैर सीएम साहब तो नहीं आए, कोई प्रशासनिक अधिकारी ही जल्दी आ जाए!
नगर परिषद सिरसा के पांच अधिकारी ओर शिकंजे में
नगर परिषद सिरसा को घपला परिषद में परवर्तित करने में अहम्  भूमिका निभाने वाले कार्यकारी अभियंता (सेवानिवृत्त) नेकीराम बिश्रोई, मुख्य  अभियंता फूल सिंह, कनिष्ठ अभियंता मुनीष, अशोक तथा जगदीश के खिलाफ मामला दर्ज करने की विजीलैंस सिफारिश पर सरकार ने सहमति की मोहर लगा दी है। क्राईम भारती को मिली जानकारी के अनुसार हरियाणा चौकसी ब्यूरों ने 2009-10 तथा 2010-11 के दौरान नगर परिषद द्वारा 128 गलियो का निर्माण टुकड़ों में तीन-तीन लाख रूपयों का बगैर टैण्डर किया गया, जिसकी विजीलैंस जांच में 15 गलियों में घटिया व कम सामग्री पाई गई थी। विजीलैंस ब्यूरों ने 30 मार्च 2015 को अपनी रिपोर्ट भेजकर सरकार ने इन पांचों के खिलाफ धारा 420 व अन्य धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी, जिस पर मुख्य सचिव हरियाणा ने ब्यूरों की सिफारिश पर सहमति व्यक्त करते हुए 30 मई 2015 को मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे। सूत्रों के मुताबिक विजीलैंस ब्यूूरों किसी समय भी मुकद्दमा दर्ज कर सकता है। इसके अतिरिक्त तत्कालीन अतिरिक्त उपायुक्त पंकज चौधरी व नगराधीश बलराज जाखड़ व तीन अन्य अधिकारियों को मॉनीटरिंग में लापरवाही का दोषी मानते हुए विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।

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