नगर परिषद के ईओ बीएन भारती व एक्सीयन धर्मवीर दहिया को नहीं मिली अग्रिम जमानत

सिरसा(प्रैसवार्ता)। नगर परिषद में भ्रष्टाचार का नंगा नाच नचाने वाले ईओ बीएन भारती व पंचायती राज विभाग के एक्सईएन धर्मवीर सिंह दहिया को जमानत नहीं मिल पाई। अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश आर के मेहता की कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दी। साथ ही पुलिस के सामने अब चुनौती यह है कि सभी आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाए।  नगर परिषद में खुलेआम भ्रष्टाचार नई कहानी गढने वाले नगर परिषद के ईओ बीएन भारती की जमानत अर्जी पर सुनवाई मंगलवार सुबह करीब सवा ग्यारह बजे शुरू हुई। सुनवाई के दौरान सरकरी वकील कौशिक, पुलिस की ओर से शिव नारायण, प्रतिपक्ष के वकील अभिनव शर्मा, ठेेकेदार हरीष सौनी मौजूद थे। सुनवाई से पहले न्यायाधीश ने कहा कि यह मामला उनके पास आ चुका है। जिसके बाद बहस शुरू हुई। बहस के दौरान प्रतिपक्ष के वकील अभिनव शर्मा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बीएन भरती का इसमें कोई रोल नहीं है। टेंडर से लेकर गली निर्माण के लिए प्रस्ताव उनके कार्यकाल से पहले की है। उन्होंने बहस के दौरान यह साबित करने का प्रयास किया कि ईओ का गली निर्माण में कोई रोल नहीं होता। सारी जिम्मेदारी एमई और जेइ की होती है। डीसी के आदेश पर गठित की गई टीम ने रिपोर्ट ओके दिखाई है। इस बहस के दौरान न ही सरकारी वकील ने कहा कि इओ को पकडऩे से कुछ लोगों के और नाम सामने आ सकते हैं।  क्योंकि पुलिस की ओर से एसआईटी गठित की जा चुकी है। यह जांच अब एसआईटी के हवाले हैं। इसलिए इनको पकडऩा जरूरी है। साथ ही कुछ कागजात हासिल करने हैं।
आखिर क्यों नहीं रख पाई पुलिस अपना पक्ष
        ईओ को पकड़े जाने से कई और नामों के खुलासे हो सकते हैं। किस प्रकार नगर परिषद में भ्रष्टाचार का नंगा नाच चल रहा था। आखिर ईओ दोषी नहीं है तो वह पुलिस से अब तक क्यों बचता क्यों फिर रहा है। किसी भी गली का प्रस्ताव ईओ के दिशा निर्देश में ही तैयार किया जाता है। टेंडर पर इओ का हस्ताक्षर होता है। अगर गली निर्माण में धांधली हो रही है तो इओ सबसे बड़ा दोषी है। क्योंकि उनके अधीन की सारा कामकाज होता है। 
 धर्मवीर सिंह दहिया को पकडऩे में जुटी पुलिस
        पंचायती राज विभाग से चार बार चार्जशिट होने वाले और भ्रष्टाचार की नई इमारत खड़ी करने वाले धर्मवीर दहिया की भी जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी। अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश आर के मेहता की कोर्ट में सोमवार को जमानत की सुनवाई हुई थी। सुनवाई के बाद फैसला मंगलवार को सुनाने की बात कही गई थी।  यह वही पंचायती राज विभाग के एक्सईएन धर्मवीर दहिया है जिसने सीटीएम के साथ मिलकर झूठी रिपोर्ट तैयार की थी। धर्मवीर सिंह दहिया पुलिस से लगातार बचता फिर रहा है। उसने अतिरिक्त जिला सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई हुई है। इसके बाद भी पुलिस आरोपियों को पकड़ नहीं पाई। जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि एक्सईएन और बीएनभारती को सिरसा में देखा गया है। दोनों भ्रष्ट ठेकेदारों व कर्मचारियों से मिलकर बचने का उपाय कर रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि उसकी पैरवी करने के लिए कुछ भ्रष्ट लोग कोर्ट में मौजूद थे।
पुलिस का प्रयास हुआ तेज 
         कोर्ट से जमानत याचिका खारिज हो जाने के बाद पुलिस ने आरोपियों को पकडऩे के लिए प्रयास तेज कर दी है। अब माना जा रहा है कि इन आरोपियों का बचना नामुमकीन है। क्योंकि लुक्का छिप्पी का यह खेल ज्यादा दिनों तक नहंी चलने वाला। साथ ही पुलिस की ओर से गठित एसआईटी की टीम आरोपियों को पकडऩे के लिए जगह-जगह छापेमारी कर रही है।
आरोपियों को सह देने वाले भ्रष्ट ठेकेदार व अधिकारियों की भी गिरफ्तारी जल्द 
   नगर परिषद के भ्रष्ट आरोपियों को सह देने वाले ठेकेदार व भ्रष्ट अधिकारियों की भी जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है। एसआईटी की टीम इन भ्रष्ट अधिकारियों व ठेकेदारों की सूची बनाने में जुटा हुआ है। इस सूची के अनुसार जिन ठेकेदारों व भ्रष्ट अधिकारियों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है उनसे पहले पूछताछ की जाएगी। उसके बाद उसे हिरासत में लिया जाएगा। अगर टीम को लगा तो उसके खिलाफ मामला दर्ज भी किया जाएगा।
जमानत याचिका खारिज होने से ठेकेदार व भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप 
       नगर परिषद ईओ व पंचायती राज विभाग के एक्सईएन की जमानत याचिका खारिज होने से ठेकेदारों व भ्रष्ट अधिकारियों में भय उत्पन्न हो गया है। क्योंकि अदालत में दोनों भ्रष्ट अधिकारियों की पैरवी इन्हीं ठेकेदारों के माध्यम से की जा रही थी। पैरवी के दौरान इन भ्रष्ट अधिकारियों के ठेकेदार अदालत में मौजूद थे। इसमें से कुछ ऐसे भी लोग मौजूद थे जो किसी न किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हुए हैं। इनको सबसे ज्यादा फायदा पहुंचा था। इन्हीं लोगों के माध्यम से पूरा नेटवर्क चल रहा था। भ्रष्टाचार की गंगा में ये लोग लगातार डूबकी लगा रहे  थे। जनता के पैसे से ऐस-मौज कर रहे थे। महंगी-महंगी गाडिय़ों में घूम रहे थे। इनके बच्चे शहर के नामी गामी अंग्रेजी स्कूल में पढ़ रहे थे। एक साल में इनकी आमदनी दोगुणी से भी ज्यादा हो गई थी। होटल से लेकर मोटल में रात दिन खाना होता था। इनकी बीबी महंगी-महंगी ब्यूटी पार्लर में जाती थी। फ्रेसियल पर सैकड़ों रुपये खर्च होते थे। गहनों से लेकर साडिय़ां अलमारी में भरी हुई है।

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