ऐनक उतार कर भाजपाई ध्वज उठाने वाले फायदे में

सिरसा(प्रैसवार्ता)। इनैलो छोड़कर भाजपाई ध्वज उठाने वाले दिग्गज प्रदेश में भाजपाई सरकार बनने पर फायदे में रहे है, जबकि भाजपाई ध्वज लंबे समय से उठाने वाले पिछड़ गए है। मौजूदा मंत्रीमंडल में लालबत्ती वाली कार पाने कृष्ण लाल पंवार वर्ष 2014 में इसराना से भाजपा टिकट पर सफल हुए थे, जिन्हें मंत्रीमंडल में स्थान मिला है, जबकि वह इनैलो संस्थापक स्व. चौधरी देवीलाल की पार्टी से चार बार विधायक बने, मगर मंत्रीमंडल में जगह नहीं मिली थी। रादौर से विजयी भाजपाई विधायक श्याम सिंह राणा मुख्य संसदीय सचिव बनाए गए है। राणा ने इनैलो टिकट पर कई बार विधानसभा व लोकसभा के चुनाव लड़े है, मगर सफल नहीं हुए, जबकि 2014 के विधानसभा चुनाव में रादौर से भाजपा टिकट पर चुनाव लड़कर विधानसभा में पहुंचे है। वर्ष 2014 में असंध में भाजपाई विधायक बने बक्शीश सिंह इनैलो में लंबे समय तक सक्रिय रहे है, मगर 2005 में नीलोखेड़ी से टिकट न मिलने पर ऐनर उतारकर भाजपाई ध्वज लिया था, जिन्हें खट्टर शासन में मुख्य संसदीय सचिव को जिम्मेवारी दी है। इनैलो पृष्ठभूमि से भाजपाई बनने वालों को मिली तव्वजों ने निष्ठावान और पुराने भाजपाई दिग्गजों को खट्टर सरकार के विरूद्ध बगावत करने की राह दिखा दी है। मंत्रीमंडल विस्तार से जगह पाने के लिए भाजपाई शीर्ष नेतृृत्व तक चक्कर काटने वाले भाजपाई दिग्गजों को उस समय चक्कर आ गए, जब उनके स्वप्र पर ग्रहण लग गया। ऐसे विधायकों में मनीष ग्रोवर (रोहतक), विपुल गोयल (फरीदाबाद), सुभाष सुधा (कुरूक्षेत्र), संतोष सारवान (बराड़ा), ज्ञान चंद गुप्ता (पंचकुला), लतिका शर्मा (कालका) इत्यादि के नाम से है, जिन्हें मंत्रीमंडल में जगह मिली है। मनीष ग्रोवर ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गृहक्षेत्र रोहतक में भाजपाई ध्वज फहराया है, तो थानेसर (कुरूक्षेत्र) से सुभाष सुधा ने इनैलो के प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा को 25 हजार से ज्यादा वोटों से पराजित करके भाजपा की उपस्थिति दर्ज करवाई है। विपुल गोयल की वकालत योग गुरू बाबा रामदेव तथा कई भाजपाई दिग्गज कर रहे थे, मगर मुख्यमंत्री ने अपने तक ही सीमित रहकर विश्वास पात्र  बने धनश्याम सर्राफ तव्वजों दी। लतिका शर्मा ब्राह्मण कार्ड लेेकर महिला कोटे से लालबत्ती वाली कार के लिए सुषमा स्वराज के चक्कर काट रही थी, तो ज्ञान चंद गुप्ता वैश्य समाज और व्यापारी वर्ग का दवाब बनाए हुए थे, मगर खट्टर ने किसी दवाब या भाजपाई दिग्गज की सिफारिश नहीं मानी और अपनी मर्जी मुताबिक शीर्ष नेतृत्व से सहमति हासिल करने में सफलता पाई। नायब सैनी को अंबाला कैंट विधायक एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज तथा धनश्याम सर्राफ को राम बिलास शर्मा तथा सांसद धर्मवीर का विकल्प बनाकर एक कूट राजनीति की है। सैनी की नियुक्ति से जहां सैनी समाज में अच्छा संदेश जाएगा, वहीं विज की पकड़ भी ढ़ीली होगी। इसी प्रकार सर्राफ को लालबत्ती वाली गाड़ी देकर खट्टर ने वैश्य समुदाय की शासन में भागीदारी देकर राम बिलास शर्मा और सांसद धर्मवीर को राजनीतिक भी दिया है। खट्टर ने मंत्रीमंडल विस्तार में जातिगत व क्षेत्रीयता के साथ गैर जाटों पर विश्वास व्यस्त करते जाट वर्ग की भागीदारी को दर किनार किया है। वर्तमान में खट्टर सरकार में तीन बनिया, दो पंजाबी, दो अहीर, दो जाट व एक सिख, एक पंडित, एक एस सी, एक एसटी, एक पिछड़ा वर्ग, एक राजपूत, एक गुर्जर व एक सैनी समुदाय की भागीदारी है।

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