राजनीतिक कोमा में है सिरसा के कई राजनीतिक दिग्गज

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा, पंजाब तथा राजस्थान की सीमा से सटे हरियाणा के जिला मुख्यालय सिरसा में कभी राजसी दिग्गजों की भीड़ होती थी, मगर आज न सिर्फ राजसी दिग्गजों का आंकड़ा कम हुआ है, बल्कि कई तो राजनीतिक कोमा में पहुंच गए है। पूर्व मंत्री एवं भाजपा की अनुशासन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर गणेशी लाल, स्वयंभू पंजाबी नेता श्याम बजाज, पूर्व मंत्री स्व. लछमण दास अरोड़ा की राजनीतिक वारिस सुनीता सेतिया, कांग्रेस नेता भूपेश मेहता, इनैलो नेता महाबीर बागड़ी, पदम जैन, लटकती-भटकती नेत्री शिल्पा वर्मा, कांग्रेस नेेत्री राजरानी जिंदल, इनैलो नेता लीलाधर सैनी, भटकाऊ दिग्गज मेहता वीरभान, हजकां नेता ओम प्रकाश फुटेला व श्याम लाल मेहता, हलोपा नेता प्रेम चन्द शर्मा, पूर्व चेयरमैन व हलोपाई कृष्ण लाल सैनी, भटकती आत्मा कृष्ण सिंगला, पूर्व मंत्री एवं भाजपाई जगदीश नेहरा इत्यादि ऐसे राजसी दिग्गज है, जो राजनीतिक कोमा में है, जिन्हें कभी-कभार किसी दुख-सुख के कार्यक्रम में देखा जा सकता है। भाजपाई जगदीश चौपड़ा, कांग्रेस के प्रांतीय प्रधान अशोक तंवर, कांग्रेस प्रवक्ता होशियारी लाल शर्मा, कांग्रेसी नेता नवीन केडिया जरूर सक्रिय है, जो लोगों के बीच रहते है। कोमा रोगी दिग्गज के हाथ, पांव व शरीर का हर अंग सामान्य रूप से काम करता है, मगर दिमाग की वो व्यवस्था, जिससे  शरीर के विभिन्न अंगों को नियंत्रण मिलता है, काम नहीं करती। जिस प्रकार कोमा में गए व्यक्ति की दशा हो जाती है, वैसी ही स्थिति कोमा में गए राजसी दिग्गजों की है, जिन्हें मिलने वाले दूरभाष करने या संदेश भिजवाने उपरांत भी मिलने नहीं आते। विद्वान, भाषण कला के विशेषज्ञ भाजपाई दिग्गज प्रो. गणेशी लाल सिरसा में कम इधर-उधर जरूर सक्रिय देखे जा सकते है। मौजूदा इनैलो विधायक मक्खनलाल सिंगला व इनैलो सांसद चरणजीत सिंह रोड़ी कोमा में तो नहीं, मगर जल्द ही प्रवेश पा लेंगे, ऐसे आसार नजर आते है। दरअसल राजनीतिक ख्वाब देखने वाले राजसी दिग्गजों के ख्वाबों पर ग्रहण लगने के चलते उनका राजनीतिक कोमा में जाना मजबूरी बन गया है। चिकित्सकों तथा वैज्ञानिकों के अनुसार दिमाग को मिलने वाले सोडियम व ऑक्सीजन में कमी आने के कारण शरीर में, जो असंतुलन पैदा होता है, उसका यदि सही समय पर पता चल जाए, तो इस समस्या से निपटना बहुत सामान्य मैडीकल प्रक्रिया है। यदि विलंब हो जाए, तो छोटी सी समस्या भी विकराल रूप ले सकती है, सामान्यत: जीवन में विचरता व्यक्ति कभी सोच भी नहीं पाता, कि वो ऑक्सीजन या अन्य तत्वों के संतुलन के चलते सही-सलामत चल फिर रहा है, मगर कोमा में पहुंचने पर वह व्यक्ति भूल जाता है कि वह कौन है। इसी तरह कोमा में गए राजसी दिग्गज स्वयं को भूल रहे है और उनके समर्थक उन्हें भूला रहे है।

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