जाट समुदाय की सत्ता में अनदेखी: इनैलों में बगावत

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा के विधानसभा चुनाव में जाट बनाम गैर जाट का कार्ड खेलकर इनैलो को राजनीतिक पटकनी देकर सत्ता की दहलीज तक पहुंची भाजपा से इनैलो में बौखलाहट है, क्योंकि जाट समुदाय को सत्ता से दूर करना इनैलो को निरंतर चुभ है। जिसका उदाहरण हाल में ही खट्टर मंत्रीमंडल के विस्तार पर इनैलो के युवा इनैलो नेता दिग्विजय चौटाला द्वारा की गई आलोचना है। मुख्यमंत्री खट्टर की सरकार में 16 में से 2 को ही तव्वजों दी गई है। दिग्विजय का आरोप है कि राज्य में जाट समुदाय से भेदभाव दर्शाता है कि इनैलो को सिर्फ जाटों की ही चिंता है, जबकि उन्हें सत्ता तक पहुंचाने में गैर जाटों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दिग्विजय की जाट समुदाय की वकालत निकट भविष्य में गैर जाटों को अपनी सोच में बदलाव करने पर मजबूर कर सकती है, जिसका खामियाजा इनैलो को भुगतना पड़ सकता है। इनैलो संस्थापक स्व. चौधरी देवीलाल 36 बिरादरी को सदैव साथ लेकर चलते रहे। यहीं कारण था कि वह देश के सर्वोच्च पद प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे थे। एक वर्ग की वकालत सत्ता की कुुंजी नहीं कहीं जा सकती, बल्कि दूसरे वर्ग के बीच खटास पैदा करने का प्रयास माना जा सकता है। तीसरे प्लॉन में भी सत्ता तक पहुंचने में पिछड़ चुकी इनैलो को जाट बनाम गैरजाट  के कार्ड को डिलीट कर एक ही वर्ग बनाने की रणनीति तैयार करनी होगी, ताकि सफलता की कुंजीं प्राप्त की जा सके।

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