हरियाणा में केजरीवाल के ''झाडू" के बिखर गए तिनके

सिरसा(प्रैसवार्ता)। दिसंबर 2013 में देश की राजधानी दिल्ली में अचानक सत्ता पर काबिज होने वाली आम आदमी पार्टी(आप) ने देश की राजनीति में हडकंप मचा दिया था और इसी के साथ कई राज्यों में ''आप" ने दस्तक दी, जिसमें हरियाणा भी शामिल है। हरियाणा में कमान संभालते ही योगेंद्र यादव के साथ डॉक्टर, वरिष्ठ अधिकारी, इंजीनियर, सीए, वकील, उद्योगपति, छात्र व किसान नेता हो लिए और पूरे प्रदेश में ''झाडू" की डुगडुगी सुनाई देने लगी। इसी के साथ ही ''आप" का कारवां तेजी से आगे बढऩे लगा। बढ़ते कारवा को देखकर ''आप" ने  लोकसभा चुनाव में रोहतक संसदीय क्षेत्र से नवीन जयहिंद, गुडग़ांव संसदीय क्षेत्र से योगेंद्र यादव, करनाल संसदीय क्षेत्र से उद्योगपति परमजीत सिंह, सिरसा संसदीय क्षेत्र से कर्मचारी नेता पूनम चंद रत्ती, हिसार संसदीय क्षेत्र से आईएएस रहे युद्धवीर ख्यालिया, सोनीपत से ट्रांसपोर्टर जय सिंह ठेकेदार, भिवानी से चार्टड अकाउटैंट ललित अग्रवाल, अंबाला संसदीय क्षेत्र से सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर एसपी सिंह, फरीदाबाद संसदीय क्षेत्र से इंजीनियर पुरूषोत्तम डागर तथा कुरूक्षेत्र संसदीय क्षेत्र से भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी की पत्नी बलविन्द्र कौर चुनावी दंगल में उतार दिया, मगर एक भी सफल नहीं हो पाया। इसी बीच टिकट वितरण को लेकर नवीन जयहिन्द ने योगेंद्र यादव के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सोशल मीडिया पर खूब शब्द बाण चलाए। दोनो के बीच कड़वाहट इतनी बढ़ गई कि  केजरीवाल भी मिठास न दे सके। हरियाणा विधानसभा चुनाव तक ''आप" के ''झाडू" के तिनके बिखरने शुरू हो गए और पार्टी ने चुनाव न लडऩे की घोषणा करके उन कार्यकर्ताओं के स्वपनों पर ग्रहण लगा दिया, जो चुनाव लड़कर विधानसभा में जाने की तैयारी किए हुए है। इसी के साथ हरियाणा में ''आप" की राजनीतिक गतिविधियों थम सी गई। फरवरी 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटों पर विजयी परचम फहराने से कार्यकर्ताओं को संजीवनी मिली। इस विजयी परचम में हरियाणवी लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका के चलते हरियाणवी अरविन्द केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर विराजमान हुए। इसी के साथ हरियाणा में पार्टी सक्रियता को बढ़ाते हुए योगेंद्र यादव ने हरियाणा में किसानों की आवाज उठाते हुए सांसदों को नमक थैलियां भेंट कर भूमि अधिग्रहण बिल का विरोध किया। इधर पार्टी के प्रदेश संयोजक डॉ. आशावंत गुप्ता ने यादव का समर्थन करके अभियान में तेजी लानी शुरू कर दी, तो नवीन जयहिन्द भी अपनी अलग डफली लेकर कूद गए। इसी के साथ ही ''आप" के कार्यकर्ता भी बंटने पर मजबूर हो गए। यादव और नवीन की खटास को लेकर बढ़ रहे विवाद पर केजरीवाल चुप्पी साध गए। नवीन समर्थकों ने एक सुनियोजित योजना के तहत यादव और प्रशांत भूषण पर दिल्ली चुनाव में पार्टी को पराजित करवाने के आरोपों में उलझा दिया। आरोप तो यह भी लगाया कि यादव केजरीवाल के संयोजक पद पर गिद्ध दृष्टि लगाए हुए है। इसी वजह से योगेंद्र यादव को पीएसी तथा बाद में पार्टी से निष्काषित कर दिया गया। योगेंद्र यादव के समर्थकों के दवाब के चलते उन्होंने गुडग़ांव से स्वराज अभियान की शुरूआत कर दी। इसी के साथ ही ''आप" से अलविदाई लेने वालों की कतार लग गई। प्रदेश संयोजक डॉ. आशावंंत गुप्ता, मुख्य प्रवक्ता राजीव गोदारा एडवोकेट, एसपी सिंह, परमजीत सिंह, जय सिंह ठेकेदार, पूनम चंद रत्ती, रमेश वर्मा, ओम प्रकाश कटारिया, रूपेंद्र कौर धारीवाल, राजेश जाखड़ एडवोकेट, रमजान चौधरी, बलबीर सिंह, प्रहलाद राय भारूखेड़ा इत्यादि ''आप" के दिग्गजों ने पार्टी छोड़ दी है, जबकि किसान नेता गुरनाम सिंह चढूंनी कोप भवन में चले गए है। ''आप" के जिला संयोजक गुडग़ांव रमेश यादव, मेवात के जिला संयोजक जफरूद्दीन पठान, नारनौल के जिला संयोजक सुरेश संधी, सोनीपत से जिला संयोजक राज सिंह दलाल, पानीपत से जिला संयोजक सुनील छोकर, कैथल से जिला संयोजक प्रदीप रापडिय़ा, करनाल से जिला संयोजक नीरज गौत्तम, कुरूक्षेत्र के जिला संयोजक संजय अग्रवाल, सिरसा के जिला संयोजक प्रहलाद सिंह तथा अंबाला के जिला संयोजक राजेंद्र गुप्ता ने पार्टी छोड़ दी है या फिर कोप भवन में चले गए है। शुरूआती दौर में ''आपÓÓ के साथ जुड़े डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, किसान लगातार ''झाडू" से दूरी बना रहे है और वर्तमान में हरियाणवी राजनीति का मानचित्र ''झाडू" के बिखरे तिनके दर्शाता है। 

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