चरम पर पहुंचा सिरसा में भ्रष्टाचार : सांवरिया

सिरसा(प्रैसवार्ता)। कामरेड राजकुमार शेखुपुरिया ने कहा कि सरकार स्टेट विजिलेंस की रिपोर्ट को अविलंब लागू करे। वर्षों की जांच पड़ताल के बाद विजिलेंस ने नगर परिषद के जिन अधिकारियों को भ्रष्टाचार का दोषी करार दिया है उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों की गिरफ्तारी में होने वाली देरी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के समान हैै। शेखुपुरिया थाना शहर के समक्ष धरनारत लोगों को संबोधित कर रहे थे।  उन्होंने कहा कि यह बड़े अचरज की बात है कि भ्रष्टाचार के आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर पत्रकार, व्यापारी, कर्मचारी व समाजसेवी अनशन व धरने पर हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार की वजह से विकास का पहिया थम गया है। सरकारी महकमों में भ्रष्टाचारियों का बोलबाला है। गरीब, मजदूर, महिलाओं व पीडि़त वर्ग को न्याय नहीं मिल रहा। गलत काम करके घूस बटोरने वाले पैसे के बल पर जांच को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि नगर परिषद का घपला घोटाला जगजाहिर हो चुका है। गलियों व सड़कों के निर्माण में बरती गई धांधली सिद्ध हो चुकी है। विजिलेंस अपनी रिपोर्ट में आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों को दोषी करार दे चुकी है लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ गांव-गांव में अलख जगाई जाएगी और 10 अगस्त को इस बारे में निर्णायक कदम उठाया जाएगा।  एडवोकेट बालकृष्ण सांवरिया ने कहा कि भ्रष्टाचार देश व समाज को खोखला कर चुका है। नगर परिषद के भ्रष्टाचार की वजह से शहर की गलियों व सड़कों की हालत बिगड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि शहर में फर्जी गलियों का निर्माण होने लगे तो भ्रष्टाचार के चरम पर होने का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने भ्रष्ट अधिकारियों की गिरफ्तारी में हो रहे विलंब को लेकर रोष का इजहार किया। उन्होंने कहा कि अनेक मामलों में सुनवाई नहीं होती, जिन पर सुनवाई होती है उन पर एफआईआर नहीं होती और जिन पर एफआईआर होती है उन मामलों में गिरफ्तारी नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि सरकार व प्रशासन के रवैये से लोगों में रोष भड़क रहा है।  हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियन के जिला सचिव सुरजीत अरोड़ा ने कहा कि पत्रकार साथी 10 जुलाई से थाना शहर के समक्ष क्रमिक अनशन पर हैं। लेकिन पुलिस व प्रशासन की ओर से भ्रष्ट अधिकारियों की गिरफ्तारी की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यूनियन के जिला प्रधान मदनलाल खोथ ने कहा कि फर्जी गली निर्माण मामले में 18 जून को मामला दर्ज किया गया, 8 जुलाई को जेई व एमई को गिरफ्तार किया गया लेकिन क्रमिक अनशन के 20 दिन बीत जाने पर भी अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी  नहीं की गई है।  इंटरनेशनल ह्यूमन राइट कौंसिल के जिला सचिव अमरजीत सिंह सोहल ने कहा कि यह सरकार के लिए बेहद शर्मनाक स्थिति है जब स्टेट विजिलेंस की रिपोर्ट पर कार्रवाई की मांग को लेकर लोगों को धरना देना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने का दावा करने वाली खट्टर सरकार को पहली कलम से ही तमाम भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा करनी चाहिए थी। सिरसा नगर परिषद में करोड़ों रुपये के घोटाले करने वालों के खिलाफ सरकार नरमी वाला रवैया अपनाए हुए है। जिसकी वजह से भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं। बुधवार को धरनारत लोगों को नहर पटवार संघ के जिला प्रधान अशोक पटवारी, हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष हीरालाल शर्मा, प्रांतीय उपाध्यक्ष मा. रोशन लाल गोयल, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता आनंद बियानी, हरियाणा पंजाबी मंच के प्रांतीय महासचिव देवेंद्र टक्कर, रोडवेज कर्मचारी नेता रतिराम, हरियाणा कर्मचारी महासंघ के पूर्व प्रधान प्रताप सिंह जाखू, का. राजेंद्र फतेहपुरिया ने संबोधित किया। क्रमिक अनशन के 20वें दिन पत्रकार इंद्रजीत अधिकारी, पत्रकार अंजनी गोयल, वार्ड नंबर 11 से समाजसेवी राधेश्याम सैनी, हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियन से जगदीश सिंहमार व इंटरनेशनल हयूमन राइट कौंसिल के जिला सचिव अमरजीत सिंह सोहल अनशन पर रहे। इस मौके पर पत्रकार राजेश सतीजा, पत्रकार मुख्तयार सिंह, पत्रकार रमेश गंभीर, पत्रकार नरेश अरोड़ा, पत्रकार आकाश चाचान, पत्रकार दीपिका, पत्रकार सोनिया, कर्ण तंवर, बलवीर, बलवीर कुमार, सतीश कुमार, सांवरमल कस्वां जमाल, राकेश भिंडासरा ढूकड़ा, सुरेश खोथ रंगड़ीखेड़ा, सुरेश खोथ अरनियांवाली, नवीन कुमार, नरेंद्र कुमार, बजरंग कुमार, भजन सिंह, रमेश कटारिया, प्रेम कुमार, अशोक वर्मा व अन्य उपस्थित थे। 
भ्रष्ट अधिकारियों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस ने छोड़े प्रयास!
सिरसा पुलिस की कारगुजारी देखकर ऐसा लग रहा है जैसे वह अदालत के फैसले का इंतजार कर रही है। फर्जी गली निर्माण मामले के आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर उसने प्रयास ही छोड़ दिए हैं। मामले के आरोपियों द्वारा उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की गई है। इस पर 3 अगस्त को सुनवाई होनी है। अदालत द्वारा यदि अग्रिम जमानत दे दी जाती है तो पुलिस पल्ला झाड़ लेगी। यदि अग्रिम जमानत नहीं दी जाती है तो आरोपियों को स्वयं सरेंडर करना होगा। ऐसे में पुलिस अपनी ओर से कोई कदम उठाती दिखाई नहीं पड़ रही। शहर पुलिस ने 18 जून को गली ब्रह्माकुमारीज आश्रम के फर्जी निर्माण मामले में एफआईआर नंबर 461 दर्ज की थी। एक माह 11 दिन का लंबा समय बीत चुका है। पुलिस की ओर से 8 जुलाई को जेई अरुण कुमार व एमई सुबेर सिंह को ही गिरफ्तार किया गया जबकि पुलिस द्वारा फर्जी गली निर्माण मामले में ईओ बीएन भारती, प्रधान सुरेश कुक्कू, ठेकेदार उमेश गुप्ता व पंचायतीराज विभाग के कार्यकारी अभियंता धर्मवीर दहिया को आरोपी बनाया गया है। इन आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर थाना शहर के समक्ष बीती 10 जुलाई से क्रमिक अनशन व धरना जारी है। लेकिन 20 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस की ओर से किसी भ्रष्ट अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं की गई है। पुलिस चाहे और आरोपी गिरफ्त से दूर रह जाए ऐसा मुमकिन नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस की ओर से भ्रष्ट अधिकारियों की गिरफ्तारी को लेकर गंभीरता नहीं बरती जा रही। पुलिस भ्रष्ट अधिकारियों को पूरा मौका दे रही है। उच्च न्यायालय में तीन अगस्त को अग्रिम जमानत पर होने वाली बहस पर शायद पुलिस की नजर है। यदि अदालत अग्रिम जमानत देती है तो पुलिस पल्ला झाड़ लेगी और यदि अग्रिम जमानत नहीं दी जाती है तो आरोपियों को स्वयं समर्पण करना होगा। ऐसे में पुलिस को बगैर हाथ पैर हिलाये ही आरोपी हाथ लग जाएंगे। 

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