परिवारवाद की चपेट में सिरसा की राजनीति

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणवी राजनीति की तर्ज पर सिरसा जिला की राजनीति भी परिवारवाद की चपेट में है। हमेशा परिवारवाद का विरोध करने वाली भाजपा भी इससे अछूती नहीं रही है। सिरसा जिले के जितने भी राजसी दिग्गज चमके है, उनमें से शायद ही कोई ऐसा चेहरा होगा, जो परिवारवाद के रोग से बचा हो। स्व. ताऊ देवीलाल की चौथी पीढि़ ने राजनीति में दस्तक दी है और वर्तमान में उसके पड़पौत्र सांसद तथा पौत्रवधु विधायिका है, जबकि बेटे मुख्यमंत्री, सांसद व विधायक, पौत्र सांसद व विधायक रह चुके है। चौधरी देवीलाल के पौत्र हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता है।  पूर्व मंत्री स्व. लक्षमण दास अरोड़ा की बेटी सुनीता सेतिया, पूर्व मंत्री जगदीश नेहरा के बेटे सुरेंद्र, पूर्व मंत्री स्व. केसरा राम के बेटे मनी राम केहरवाला पूर्व विधायक, मनीराम पूर्व विधायक के बेटे डॉ. सीता राम पूर्व विधायक, पूर्व सांसद रणजीत सिंह के बेटे गगनदीप, पूर्व विधायक स्व. वैध राम दिपाल के भतीजे देव कुमार शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी डॉ. केवी सिंह के बेटे अमित सिहाग, कांग्रेस प्रवक्ता होशियारी लाल शर्मा के बेटे राजकुमार शर्मा राजनीति में है, जबकि परिवारवाद का विरोध करने वाली भाजपा की अनुशासन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. गणेशीलाल के बेटे मनीष सिंगला, मुख्यमंत्री हरियाणा के राजनीतिक सलाहकार जगदीश चौपड़ा के बेटे अमन चौपड़ा भी खुलकर राजनीति करने लगे है। सिरसा के राजनीतिक मानचित्र से कुछ चेहरे गायब हो चुके है या फिर कोमा में चले गए है। ऐसे चेहरों में पूर्व सांसद हेतराम, इनैलो नेता अमीर चावला, भाजपा नेता प्रदीप रातूसरिया, इनैलो नेता वीरभान मेहता, पूर्व मंत्री गोपाल कांडा इत्यादि शामिल है, जिन्हें कभी कभार राजनीतिक कार्यक्रमों में देखा गया है। मौजूदा राजनीति में कांग्रेस के नवीन केडिया, होशियारी लाल शर्मा, भाजपा के मनीष सिंगला और अमन चौपड़ा, बसपा के मूलचंद राठी, राहुल सेतिया की गतिविधियां ही दिखाई देती है, जबकि अन्य राजसी दिग्गज कोमा में नजर आते है।

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