गौमाता की पूजा का विशेष महत्व: स्वामी सदाशिव नित्यानंद गिरी

गौशाला की हुई वेबसाईट लॉच

सिरसा(प्रैसवार्ता)।  स्वामी सदा शिव नित्यानंद गिरी ने कहा कि भारत में गांय को गऊ माता कहकर पूजा जाता है और गऊ माता की श्रद्धा से सेवा की जाती है। गऊ का पूजन भारतीय संस्कृति में एक विशेष महत्व रखता है। स्वामी सदा शिव नित्यानंद गिरी  शुक्रवार को गांव फूलकां स्थित श्री लक्ष्येश्वराश्रम सेवा सदन में पत्रकारों से रूबरू हो रहे थे। स्वामी ने कहा कि आज गौमाता की अनदेखी की जा रही है, क्योंकि सभी इसके महत्व से अनभिज्ञ है। गौमाता के दूध में वह शक्ति है, जो
अन्य किसी पदार्थ में नहीं है। उन्होंने कहा कि इंसान को संस्कारवान बनना चाहिए और नशो से दूर रहना चाहिए, क्योंकि नशा नाश करता है। युवा देश का भविष्य होता है और नशों के पड़कर युवाओं को भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि युवा देश की धरोहर है। इसके अतिरिक्त देश व प्रदेश में हो रही कन्या भ्रूण हत्याएं एक कलंक है, सबसे बड़ा पाप है। बेटियां तो लक्ष्मी होती है, जो ससुराल व मायका दोनो का भविष्य संवारती है, इसके बावजूद कन्या भ्रूण हत्याएं होना शर्म की बात है। पत्रकार वार्ता में स्वामी नित्यानंद गिरी ने गौशाला की वेबसाईट डब्लयू डब्लयू डब्लयू डॉट श्रीगौशालाफूलकां डॉट कॉम(http://shreegaushalaphulkan.com) को भी लॉच किया, जिसमें गौशाला की हर गतिविधियों को अपलोड़ किया जाएगा। इसके उपरांत आयोजित श्री मद्भागवत कथा में स्वामी नित्यानंद गिरी ने कहा कि गाय, संत, मंदिर व धर्म का अधिकार खाने वाला नरक का भागी बनता है और उसे अगले जन्म में जानवर की यौनी मिलती है। इसलिए ऐसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म, न्याय व सत्य का रास्ता छोड़ देने वालों का हमेशा विनाश होता है और अन्याय का परिणाम खतरनाक होता है, जबकि न्याय पथ और धर्म के मार्ग पर चलने वालों को कई कठिनाईयों से गुजरना पड़ता है, मगर इसका परिणाम बड़ा कल्याणकारी होता है। गौशाला के प्रधान रविन्द्र कुलडिय़ा ने बताया कि गौशाला को तूडी रखनेे के लिए एक शैड की जरूरत है, जिसके लिए कथा के माध्यम तथा ग्राम वासियों के सहयोग से एकत्रित धनराशि से शैड बनाया जाएगा। इस शैड़ पर लगभग 30 लाख रूपए खर्च होने का अनुमान है और इसका शिलान्यास 27 अगस्त को किया जाएगा।

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