साधु, डेरा मुखी फैला रहे है अंध विश्वास

बठिण्डा(प्रैसवार्ता)।  देश के अन्य राज्यों की तरह पंजाब में अंधविश्वास कम होने की बजाए तेजी से बढ़ रहा है। भारत के विभिन्न विभिन्न राज्यों में 1240 महिलाओं को डायन कहकर हत्या कर देने के मामलेे हो चुके है। पंजाब के कई गुरूद्वारों के ग्रंथी भी ज्योतिष की राह पर चल पड़े है, जो सिख समुदाय को गुमराह कर रहे है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि पंजाब के ज्यादातर ग्रामों में आधा दर्जन से ज्यादा चौकी भरने वाले औझा बाबाओं के डेरे है, जो विभिन्न विभिन्न शहीद, पीर-फकीरों की आत्माओं का अपने शरीर में प्रवेश बताकर लोगों को गुुमराह करते है। इन पाखंडियों की चपेट में ज्यादातर महिलाएं आती है, जिसका यह लोग आर्थिक शोषण करने के साथ साथ शारीरिक शोषण करने से भी गुरेज नहीं करते। समाजसेवी संस्थाएं भी इस सदंर्भ में चुप्पी साधे हुए है, जबकि यह पांखड़ी लोग भूत-प्रेत निकालने के नाम पर पुरूष, महिलाओं से मारपीट करते है। पंजाब के एक ग्रंथी द्वारा पांच हत्याओं उपरांत की गई आत्महत्या कई प्रश्र खड़े करती है, क्योंकि इन हत्याओं का कारण भी अंधविश्वास ही बताया जा रहा है। केवल इतना ही नहीं पंजाब के एक ग्राम की महिला सरपंच ने भूत प्रेत निकालने के नाम पर महिला की हत्या कर दी थी। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार बिहार और झारखंड में अंधविश्वास के नाम पर बीते दो दशक में 1240 महिलाओं को डायन कहकर मार दिया जा चुका है, जबकि सैंकड़ों महिलाएं अत्याचारों की चपेट में आई है। बिहार में ऐसे 248 मामले दर्ज किए जा चुके है, जबकि झारखंड  में अंधविश्वास के नाम डायन समझी जाने वाली महिलाओं को गैर मनुष्य ढंग से दंडित किया गया है, जिनमें निवस्त्र कर ग्राम में घुमाना, सिर मुंडवा देना, मलमूत्र पिलाने जैसी घटनाएं भी शामिल है।

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