न्याय के लिए भटक रहा है परिवार, हत्या के आरोपियों की मांग रहा है गिरफ्तारी

सिरसा(प्रैसवार्ता)।  लोगों को न्याय दिलाने का दम भरने वाली हरियाणा पुलिस के दावे की पोल उस समय खुल जाती है जब एक परिवार इंसाफ की मांग को लेकर 2 महीने से पुलिस दरबार के चक्कर लगाने को मजबूर हो रहा है।  आलम ये है कि अभी तक पीडि़त परिवार की पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की है जिसके चलते उन्होंने पुलिस की शिकायत उच्च अधिकारियों को करने का मन बनाया है।  मामला सिरसा के गांव भारूखेड़ा का है जिसका एक परिवार न्याय की गुहार के लिए पुलिस के आगे अपनी फरियाद लेकर सैंकड़ो बार गया लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।  दरअसल भारूखेड़ा निवासी ओम प्रकाश की बेटी सरोज हिसार के डोगरान मोहल्ला में समर्पण आरोग्य सेंटर में काम करती थी।  आरोप है कि 7 जुलाई 2015 को सेंटर के शांति विला में उसकी बेटी फांसी पर लटकी हुई मिली थी। मृतका के परिजनों के मुतबिक उसकी हत्या की गई है जिस पर उसके शरीर पर चोटो के निशान भी है लेकिन हिसार पुलिस ने इसे आत्महत्या का केस बनाकर लीपापोती की है। वीओ मृतका के परिजनों ओम प्रकाश और रमन ने बताया कि उसकी बेटी ने आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या की गई है।  पुलिस मामले को दबाना चाहती है। जिस डॉक्टर के पास उसकी बेटी एक सप्ताह पहले ही आई थी। उससे अभी तक पूछताछ भी नहीं की गई है। उसकी बेटी के कमरे में सूटकेस, बैग व अन्य सामान रखा था, वह भी मौके से गायब था।  मृतक सरोज के परिजनों ने अब प्रधानमंत्री , मुख्यमंत्री और हरियाणा के ष्ठत्रक्क से न्याय की गुहार लगाई है। दूसरी तरफ मृतक सरोज की सहेली वनिता भारूखेड़ा ने सोशल साइट पर न्याय की जंग छेड़ दी है। उसने अपने स्तर पर पुलिस के उच्च अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप कर न्याय की गुहार लगाई है। पीडि़त परिवार ने मुख्यमंत्री हरियाणा, डीजीपी हरियाणा, मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रपति व महिला आयोग को भी पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
वीओ वीओ बेटी बचाओ का नारा देने वाली सरकार नहीं दिला रही न्याय
फेसबुक के जरिए छेड़ी न्याय की जंग में वनिता ने लिखा है कि बेटी बचाओ का नारा देने वाली सरकार बेटियों के साथ हो रहे अन्याय पर चुप है। वनिता ने लिखा है कि यह नारा किसी गरीब की बेटी को मौत तक पहुंचा सकता है। क्योंकि गरीब की बेटी पढ़ती है तो उसे अकेले कहीं बाहर रहना पड़े और उसके साथ कुछ गलत हो जाए तो उसे न्याय नहीं मिल पाता। पोस्ट में लिखा है कि पुलिस मर्डर को सुसाइड बनाकर केस दर्ज तक नहीं करती, जबकि लड़की के शरीर पर चोट के कई निशान थे।

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