हरियाणा: लालबत्ती के इच्छुकों को दिखानी होगी चुनावी ताकत

सिरसा(प्रैसवार्ता)। लालबत्ती वाली कार के इच्छुुकों को हरियाणा में होने वाले पंचायती राज के चुनावों में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना होगा और वह भी ऐसी स्थिति में, जब भाजपाई दिग्गज लोगों के सामने जाने से गुरेज करने को प्राथमिकता दे रहे हो। प्रदेश के 47 विधायक तथा 43 पराजित रहे भाजपाई प्रत्याशियों में से ज्यादातर लालबत्ती वाली कार की लालसा काफी समय से बनी हुई है, मगर खट्टर सरकार न जाने क्यों इनकी उम्मीदों पर खरा उतरने से परहेज बनाए हुए है। पंचायती चुनाव परिणाम भाजपाई दिग्गजों की आशा पूरी कर सकते है, बशर्त है कि पंचायती चुनाव में पास होकर दिखाए। भाजपा हाईकमान की नजर रहेगी कि किस क्षेत्र के ग्रामीण आंचल में किस दिग्गज का प्रभाव कितना है। दूसरी तरफ भाजपाई दिग्गज इस उलझन में है कि भाजपा सरकार ने अपने दस मास के कार्यकाल में लोगों को नाराजगी दी है और पार्टी के दिग्गजों तथा सक्रिय कार्यकर्ताओं को शासन देने में पूर्णयता अनदेखी का सामना करना पड़ा है। कार्यकर्ता चुनावी समर में उतरने में रूचि नहीं ले रहे। पार्टी ने सभी दिग्गजों व कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए है कि वह भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की मदद करें, ताकि जिला परिषदों व पंंचायतों पर कब्जा करके ग्रामीण आंचल में दस्तक देकर इनैलो-कांग्रेस को भी राजनीतिक पटकनी दी जा सके। सरकार में प्रभावी पद के इच्छुक दिग्गजों ने मजबूर होकर पंचायती चुनाव में उतरने की तैयारी शुरू कर है, ताकि हो सकता है कि उनकी उम्मीद पूरी हो जाए। भाजपाईयों का इस परीक्षा में पास होने के लिए परिश्रम करना होगा। राज्य में जब से भाजपाई शासन बना है, तभी से सरकारी तंत्र सरकार पर हावी है और लोगों के छोटे-छोटे कार्यों के लिए भाजपाई दिग्गजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिसके चलते गतिरोध निरंतर बढ़ रहा है। भाजपाईयों के काम न होने के चलते उनकी छवि पर प्रश्र चिन्ह लग रहे है। फिलहाल भाजपाई विधायक व दिग्गजों की पंचायती चुनाव में क्या भूमिका रहेगी, उस पर सब की निगाहें टिकी हुई है।

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