हरियाणा में दम तोड़ रहा है साक्षरता मिशन

सिरसा(प्रैसवार्ता)। पंचायती चुनाव में शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य तथा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं कार्यक्रम की डुगडुगी बजाने वाले हरियाणा में बुनियादी शिक्षा से महरूम बालिगों में साक्षरता की अलख जगाने वाला साक्षर भारत मिशन अभियान प्रदेश में दम तोड़ता नजर आ रहा है। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार हरियाणा में लगभग तीन वर्ष पूर्व शुरू इस योजना से ग्रामों में स्थापित लोक शिक्षा केंद्रों में संसाधनों की अब भी कमी है। केंद्र सरकार के प्रावधान मुताबिक शिक्षा केंद्रों में पुस्तकें, मैगजीन व अन्य पाठय सामग्री के लिए पांच हजार रूपए, प्रोग्राम सपोर्ट के लिए साढ़े बारह हजार रूपए, कैरोसिन व लाईटिंग व्यवस्था के लिए अढ़ाई हजार रूपए, बिजली-पानी व रख-रखाव इत्यादि के लिए साढ़े चार हजार रूपए तथा दफ्तर खर्च के लिए अढ़ाई हजार प्रतिवर्ष निर्धारित किए गए है। राज्य में इन केंद्रों में न तो पुस्तकें, मानचित्र, चार्ट व पाठ्य सामग्री मिली है और न ही प्ररेकों को साईकिल मिली है। राज्य सरकार ने अगस्त 2012 में दस जिलों में 62 खंड के प्रत्येक ग्राम में लोक शिक्षा केंद्र स्थापित कर दो प्ररेकों की नियुक्ति की थी। प्रत्येक प्ररेक का मानदेय दो हजार रूपए प्रति मास सहित प्रत्येक शिक्षा केंद्र पर 75 हजार रूपए वार्षिक खर्च निर्धारित किया था। अन्य खर्चों पर चर्चा करना, तो दूर की बात है, प्रतिदिन केंद्र में छह घंटे प्रतिदिन काम करने वाले प्ररेकों को पिछले छह मास से वेतन नहीं मिल पाया। राज्य सरकार ने प्र्रदेश में न्यूनतम मजदूरी 9699 रूपए प्रति मास कर दी है, जबकि प्ररेकों को मात्र दो हजार रूपए मानदेय दिया जा रहा है। संसाधनों के नाम पर शिक्षा केंद्रों को एक मेज, दो कुर्सी उपलब्ध करवाई गई है, जो निम्र गुणवत्ता की है, जबकि पाठ्य सामग्री पिछले दो वर्ष से नहीं आई।

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