एक दिन के पुलिस कमिश्रर को चाहिए जनसहयोग

मां-बाप किडनी देने को तैयार, ट्रांसप्लांट के लिए नहीं है पैसा

सिरसा(प्रैसवार्ता)। यह खबर दूसरी खबरों से अलग हटकर है। इस खबर में कोई अपराधी नहीं है। कोई नेता नहीं। है तो बस गरीबी और इस गरीबी में जीवन और मौत के बीच झूलती एक मासूम की जिंदगी। मासूम भी ऐसा जिसकी एक ख्वाहिश संस्था ने पूरी करवा दी थी। ख्वाहिश थी पुलिस अफसर बनने की। राजस्थान की संस्था मेक अ विश ने सिरसा के नोहरिया बाजार की गली कांडा वाली के रहने वाले जगदीश शर्मा के 10 वर्षीय पुत्र गिरीश की ख्वाहिश को पूरा करवाया था। राजस्थान के अस्पताल में दाखिल गिरीश को इस संस्था ने पुलिस के साथ मिलकर एक दिन का पुलिस कमिश्रर बनवाया था। यह तस्वीर का सुखद पहलू है। लेकिन अब ख्वाहिश बीमारी पर फतह पाकर जिंदगी जीने की है। एक दिन के लिए पुलिस कमिश्रर बने मासूम गिरीश की दोनों किडनिया फेल हो चुकी हैं। यानी दोनों किडनियों ने काम करना बंद कर दिया है।
जगदीश शर्मा रेहड़ी लगाकर परिवार की गुजर-बसर बमुश्किल चला पाता है। ऐसे में बेटे गिरीश की किडनी बदलेगी तो उसे नया जीवन मिलेगा। मां-बाप किडनी देने को तैयार हैं लेकिन  गरीबी का सितम देखिए, किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भी पैसा नहीं है। ईलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खा चुके गिरीश के पिता जगदीश रूंधे गले से अपने बेटे को बचाने की अपील लोगों से करते हैं। मां भी चाहती है कि उसका लाल बच जाए और वो अपने हर सपने को पूरा कर सके। हमारी टीम ने भी इस परिवार की पीड़ा को जाना। गरीबी और उस पर आई भयंकर बीमारी ने पूरे परिवार की कमर तोड़ रखी है। मासूम गिरीश का ईलाज अब तक जयपुर के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा था, लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट के लिए उसे अहमदाबाद के अस्पताल में ले जाना पड़ेगा। परिजनों के मुताबिक आठ से दस लाख रुपये का खर्च किडनी बदलवाने में आएगा। परिवार के पास इतना पैसा नहीं है कि वह 10 साल के गिरीश को नई जिंदगी दे सकें। सरकार से भी यह परिवार सहायता चाहता है और दानी संस्थाओं और लोगों से भी परिजन यही अपील करते हैं कि उन्हें कोई सहायता मिल जाए।

No comments