पशुओं को रोग मुक्त करती है होम्योपैैथी दवाएं: डॉ. कमल जिंदल - The Pressvarta Trust

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Friday, September 11, 2015

पशुओं को रोग मुक्त करती है होम्योपैैथी दवाएं: डॉ. कमल जिंदल

सिरसा(प्रैसवार्ता)। विश्वभर में तेजी से अपनी पहचान बनाकर लोगों के स्वास्थय की सही देखभाल करने वाली होम्योपैथिक दवाईयां मनुष्यों को ही नहीं, बल्कि पशुओं को भी रोगों से मुक्त करती है। राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति की श्रेणी ले चुकी होम्योपैथी दवाईयां मनुुष्य एवं पशु रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर रोग ठीक करती है। इसकी पुष्टि पूरे विश्व में तेजी से आगे बढ़ रही होम्योपैथी प्र्रणाली से होती है। गर्व की बात है कि पूरे विश्व में होम्योपैथी का नाम रोशन करने में डॉ. कमल जिंदल और रूपाली जिंदल को श्रेय मिला है। उक्त बात डॉ. कमल जिंदल ने इंटरनैशनल कांफ्रेंस ब्राजील में भाग लेने उपरांत शुक्रवार को एक निजी होटल में पत्रकारों से रूबरू होते हुए कही। उन्होंने कहा कि अभी तक होम्योपैथी से इलाज किस ढंग, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संभव है, यह तो प्रमाणित नहीं हो सका, मगर इसका वैज्ञानिक प्र्रमाण डॉ. जिंदल दंपति ने पहली बार पशु अनुसंधान विश्वविद्यालय हिसार की प्रयोगशाला में करवाया। डॉ. जिंदल दंपति ने मैस्टाक्योर नामक पशुओं के लिए दवा की खोज की है, जो पशुओं के थन संबंधी रोगों का उपचार करती हैै, जिसका प्रमाण दो वर्ष तक विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में जांच उपरांत रिपोर्ट से मिलता है। रिपोर्ट के अनुसार, मैस्टाक्योर से पशुओं के थन में खून का आना, छेछड़े आना, थन का सूज जाना व गांठ पड़ जाना, थन का ऊपर चढऩा व बंद होना इत्यादि ठीक हो जाता है। इसके बाद रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का प्रयोग आईवीआरआई बरेली में एक वर्ष तक चलता रहा। एक वर्ष उपरांत प्राप्त रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि मैस्टाक्योर दवा की 30-30 बूंद दिन में तीन बार पशु को देने से पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता तीन गुणा बढ़ गई, जिससे रोग के कीटाणु खत्म हो गए और पशु के थन रोग मुक्त हो गए। इस प्रयोग में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस इलाज से न तो पशु की भूख कम हुई और न ही दूध में दवा का कोई अंश पाया गया। दूसरी चिकित्सा पद्धतियों द्वारा होम्योपैथी को मनोचिकित्सा दवा के रूप में किए जा रहे गलत प्रचार को खारिज करते  हुए डॉ. जिंदल ने कहा कि पशुओं को मनोचिकित्सा दवा द्वारा ठीक नहीं किया जा सकता है, इसलिए मैस्टाक्योर दूसरी चिकित्सा पद्धतियों से ज्यादा प्रभावशाली रही है और उनके रिसर्च पेपर को पूरे विश्वस्तर पर पढ़ा गया, जो किसी गर्व से कम नहीं कहा जा सकता।

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