देश भर के आईएमए चिकित्सक 16 नवंबर को मनाएंगे सत्याग्रह दिवस

आईएमए हरियाणा के अध्यक्ष डॉ. अनिल गोयल हुए पत्रकारों से मुखातिब
सिरसा(प्रैसवार्ता)। टूटते भरोसे के इस दौर में डॉक्टरों मरीजों को अपने संबंधों को एक बार फिर समझने की जरूरत है, जिससे मरीज डॉक्टर के बीच के भरोसे का रिश्ता मजबूत हो सके। यह बात आईएमए हरियाणा के अध्यक्ष डॉ. अनिल गोयल ने आईएमए उपाध्यक्ष डॉ. ऐ.के. अग्रवाल, महासचिव डॉ. एस.पी भट्टाचार्य, सरंक्षक डॉ. वेद बैनीवाल, जिला प्रधान डॉ. अंजनी गोयल, महासचिव डॉ. मुंजाल के साथ आज स्थानीय होटल आर सी रिजेंसी में पत्रकारों से रूबरू होते हुए कही। डॉ. गोयल ने कहा कि भारत में डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन अब यह दर्जा दरक रहा है। इसलिए आईएमए चाहता है कि समाज में ऐसा माहौल बनाया जाए, जिससे डॉक्टर शांति और गरिमा से काम कर सकें। इससे मेडिकल क्षेत्र के लोग बिना किसी हमले और शोषण के डर के एक कदम आगे बढ़ कर बड़े स्तर पर समाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर पाएंगे। डॉ. गोयल ने कहा कि आईएमए की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने यह निर्णय लिया है कि 16 नवंबर को आईएमए पूरे देश में सत्याग्रह दिवस के रूप में मनाएगी, जिसकी घोषणा हरियाणा में सिरसा से की गई है। इस दिन आईएमए डॉक्टर सुबह 9 से 11 बजे तक किसी भी प्रकार के स्वास्थय शिविर में भाग लेंगे। 11 बजे से 12.30 बजे तक आईएमए डॉक्टर रोष मार्च निकालेंगे और प्रशासन को ज्ञापन देंंगे। इसके बाद वे मीडिया से भी रूबरू होंगे। डॉ. गोयल ने कहा कि समय की यह जरूरत है कि डॉक्टर संवेदनशील हो और मरीज तथा उसके परिवारजन सहनशीलता रखें। पीएनडीटी एक्ट के संदर्भ में स्वास्थय विभाग या पुलिस विभाग को जांच कर लेनी चाहिए और उन्हें रंगे हाथों ही एक्ट का उल्लंघन करने वालों पर शिकंजा कसना चाहिए। यदि कोई चिकित्सक इस प्रकार की घटना को अंजाम देता है, तो आईएमए उसे किसी प्रकार का भी सहयोग नहीं देगी, बल्कि उसे अपनी संस्था से निष्काषित करेगी, इससे पूर्व भी कई चिकित्सकों को लेकर ऐसा निर्णय लिया जा चुका है। डॉ. गोयल ने कहा कि लघु स्तर पर क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टरों के लिए क्लीनिकल एक्ट लागू करने है, उससे आम मरीज के लिए इलाज महंगा हो जाएगा। सरकार को चाहिए कि जनहित को ध्यान में रखते हुए ऐसा निर्णय ले, जिससे मरीज और चिकित्सक पर किसी प्रकार का भी आर्थिक प्रभाव न पड़े। इसके अतिरिक्त क्रोस पैथी में बगैर चिकित्सक की मुशवरा पर्ची के लिए उपचार उचित नहीं है, इसलिए इस प्रकार का उपचार चिकित्सक की सिफारिश पर ही किया जाना चाहिए। डॉ. अंंजनी अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सकों और मरीजों के बीच में किसी प्रकार के विवाद के लिए आईएमए ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है, जिसमें वे स्वयं, डॉ. वेद बैनीवाल, सुदीप मुंजाल,  डॉ. राजेंद्र सिंह तथा डॉ. दिनेश बिजुआनी शामिल है, जो हर विवाद का निष्पक्षता से निपटारा करवाएंगे।

No comments