सिरसा पुुलिस की कार्यप्रणाली पर उठी कई उंगलियां, 3 माह उपरांत पुलिस को याद आया कानून

चंडीगढ़(प्रैसवार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही देश को भ्रष्टाचार मुक्त करने की बात कही हो, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ इमानदारी से लड़ रहे लोगों की राह आसान है? अगर बात हम हरियाणा के सिरसा जिला की करें, तो यहा सिरसा शहर थाना के बाहर अनेकों लोगों ने क्रमिक अनशन शुरू किया हुआ है, जिसे 89 दिन हो चुके है। अब इस धरने को उठाने का प्रयास शुरू हो गया है। शहर थाना की ओर से पत्रकार अंजनी गोयल सहित अनेक धरनारत् लोगों को हरियाणा पुलिस एक्ट 2007 के सेक्शन 69 के तहत नोटिस दिया गया है। यह नोटिस पुलिस उप अधीक्षक जगदीश कुमार की ओर से सोमवार देर सायं यह नोटिस भेजे गए। नोटिस को लेकर अनशनकारियों में रोष है और उनका कहना है कि पुलिस ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को गिरफ्तार करने में नाकाम रही है जिन्होंने जनता के पैसे को डकारने का काम किया है। पुलिस भ्रष्टाचार के मामले में नामजद अधिकारियों को काबू नहीं कर पाई। अपनी विफलता छिपाने के लिए अब पुलिस ओछे हथकंडे अपनाने लगी है। इसलिए पुलिस को चाहिए कि वह आंदोलनकारियों को ही गिरफ्तार कर लें। उन्हेें आंदोलनकारियों को गिरफ्तार करने के लिए ज्यादा मशक्कत भी नहीं करनी पड़ेगी। थाना शहर के बाहर से ही उन्हें आंदोलनकारियों को पकड़कर सलाखों के पीछे भेजना है। दिलचस्प तथ्य यह है कि यदि यह धरना कानून मुताबिक नहीं है, तो पिछले तीन महीनों से पुलिस क्या कर रही थी। इस नोटिस से पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठने लगे है।
कितने धरना व प्रदर्शनों को पुलिस ने दी है मंजूरी?
शहर पुलिस की ओर से हरियाणा पुलिस एक्ट 2007 के सेक्शन 69 के तहत नोटिस देकर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक कितने धरने-प्रदर्शनों को मंजूरी दी गई है। भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकामयाब पुलिस प्रशासन क्या इस प्रकार के नोटिस जारी कर अपनी भड़ास नहीं निकाल रहा? पेयजल व सीवरेज तो कभी सड़क मरम्मत की मांग को लेकर सैकड़ों बार रोड जाम किए जा चुके हैं। अनेक बार बगैर अनुमति और धारा 144 को तोड़ते हुए रैलियां व जुलूस निकाले जा चुके हैं। पुलिस प्रशासन इस बात का जवाब दे कि ऐसा कैसे संभव हुआ?
दंगा भड़कने की जताई है आशंका
शहर पुलिस ने धरनारत लोगों को जिस सेक्शन के तहत नोटिस भेजे हैं उस सेक्शन के तहत दंगा भड़कने की आशंका पर ही नोटिस भेजे जाते हैं। हिंदू-मुस्लिम अथवा डेरा-सिख विवाद के चलते शांति भंग होने की आशंका के चलते सेक्शन 69 के तहत नोटिस भेजे जाते हैं। धरना अथवा लोगों के एकत्रित होने पर यदि दंगा भड़कने की आशंका हो तभी पुलिस इस सेक्शन का सहारा लेती है। लेकिन थाना शहर के समक्ष 89 दिनों से जारी धरना बेहद शांतिपूर्वक रहा। इस दौरान किसी प्रकार की कोई आपत्तिजनक कार्रवाई नहीं की गई है। आंदोलनकारी शांतिपूर्वक, बगैर किसी रुकावट के लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जता रहे हैं और पुलिस प्रशासन से नगर परिषद के भ्रष्ट अधिकारियों को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं। इतने समय से जारी धरने के बावजूद कभी कोई अड़चन, कोई विवाद अथवा किसी प्रकार की रुकावट नहीं आई है। 

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