खट्टर सरकार की प्रथम वर्षगांठ: खुश नहीं है भाजपा के पुश्तैनी कार्यकर्ता: लालबत्ती के इच्छुकों का टूटने के कगार पर है सब्र का प्याला

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा में पहली बार स्पष्ट बहुमत लेकर सत्ता में आई भाजपा से एक वर्ष के कार्यकाल में पुराने निष्ठावान पुश्तैनी कार्यकर्ता खुशी नहीं है, क्योंकि अनुभवहीनता के चलते खट्टर सरकार उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाई और वह उपेक्षा के दंश से बचने के लिए अज्ञातवास में चले गए। सरकार बनते ही नई उमंग के संचार से लबालब भाजपाई दिग्ग्गजों की नजर अंदाजी से भाजपा का जनाधार बढऩे की बजाए खिसकने लगा है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में टिकट से वंचित रहने वालों को भाजपाई सरकार से मान-सम्मान की उम्मीद थी, उस पर भी खट्टर सरकार की ओर से कंजूसी की जा रही है। भाजपा के निष्ठावान दिग्गजों ने दलबदलुओं को तो बर्दाश्त कर लिया, मगर अब उनकी अनदेखी कोस रही है। शायद यहीं कारण रहा होगा कि भाजपाई जनाधार खिसकना शुरू  हो गया है। निष्ठावान भाजपाईयों की अनदेखी पर दलबदलुओं का भारी पडऩा भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा  सकता, क्योंकि दलबदलू राजसी दिग्गजों का हृदय परिवर्तन होना हरियाणवी राजनीति में सामान्य माना जाता है। अपनी पहली वर्षगांठ पर भाजपाई भले ही प्रसन्नता का इजहार करके गुणगान का राग अलाप रहे, मगर सत्यता यह है कि लालबत्ती के इच्छुकों के सब्र का प्याला टूटने के कगार पर पहुंच चुका है। हरियाणवी राजनीति में राजसी दिग्गज लंबा इंतजार नहीं करते, जिसकी पुष्टि प्रदेश का राजनीतिक इतिहास करता है। इतिहास साक्षी है कि देवीलाल, बंसीलाल जैसे मुख्यमंत्रियों को भी विधायकों और पार्टी दिग्गजों के समक्ष नतमस्तक होना पड़ा था। प्रदेश में ऐसे भाजपाई दिग्गजों की कमीं नहीं है, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में अपना टिकट त्याग कर भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में कड़ी मशक्कत की और भाजपाई शासन बनते ही लालबत्ती वाली गाड़ी का ख्वाब संजोया था। टिकट का त्याग, लालबत्ती का इंतजार और ऊपर से अनदेखी के चलते ऐसे भाजपाई दिग्गज अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित हो रहे है। राजनीतिक तौर पर चिंतित भाजपाई दिग्गजों के लिए भाजपा सरकार की प्रथम वर्षगांठ किसी धमाके से कम नहीं है, जो कभी भी धमाका कर सकती है। भाजपाई विधायक, दिग्गजों की सुनवाई न होने और उनकी उम्मीदों पर ग्रहण से उनके सब्र का प्याला टूटने के कगार पर आ गया है। पार्टी की अंदरूणी विस्फोटक स्थिति से वाकिफ भाजपा आलाकमान के निर्देश पर सरकार ने कुछ समय पूर्व सरकारी विभागों में सुझाव के लिए कमेटिया, कष्ट निवारण समितियों में रूष्ट भाजपायियों को जगह देकर मरहम लगाने का काम किया है, मगर यह नाकाफी माना जा रहा है। अफसरशाही का सरकार पर भारी होना भाजपाई दिग्गजों के लिए मुसीबत बना हुआ है, क्योंकि उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही है। सूत्रों के अनुसार विधानसभा चुनाव में अन्य राजनीतिक पार्टियों से अलविदाई लेेकर भाजपाई ध्वज उठाने वाले राजसी दिग्गज भी भाजपा सरकार में घुटन महसूस कर रहे है।

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