गणेशी लाल दे सकते है राज्यसभा में दस्तक!

सिरसा(प्रैसवार्ता)। पूर्व मंत्री हरियाणा तथा भाजपा की अनुशासन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. गणेशी लाल राज्यसभा में दस्तक देने जा रहे है, इसकी राजनीतिक गलियारों में पूरी चर्चा है। सत्ता में आने उपरांत एनडीए ने अभी तक किसी सदस्य को नामित नहीं किया है, मगर नवंबर मास में भाजपाई दिग्गजों की राज्यसभा में उपस्थिति होगी, क्योंकि 17 नवंबर 2015 को राज्यसभा सदस्य एच के दुआ तथा डॉ. अशोक गांगुली का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसी प्रकार मणिशंकर अय्यर, डॉ. भाल चंद मुंगेरकर, जावेद अख्तर सहित 7 सदस्यों का कार्यकाल मार्च में समाप्त हो रहा है। ऐसे में एनडीए सरकार अपने पसंदीदा चेहरों को राज्यसभा में भेज सकती है। अगले वर्ष 2016 में पांच दर्जन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है तथा राष्ट्रपति की ओर से एक दर्जन सदस्य नामित किए जाने है। अगले वर्ष उत्तर प्र्रदेश की ग्यारह सीटों पर चुनाव होने है, जिनमें से मौजूदा राजनीतिक गणित मुताबिक समाजवादी पार्टी का छह सीटों पर विजयी परचम लहराना लगभग तय है, जबकि किसी जोड़-तोड़ की बदौलत यह आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है। वर्तमान में यूपी से राज्यसभा में बसपा के छह समाजवादी पार्टी के तीन, कांग्रेस तथा भाजपा के पास एक-एक सीट है। वहीं यूपी के अतिरिक्त अगले वर्ष बिहार के पांच तथा राजस्थान की चार राज्यसभा सीटों सहित 65 पर चुनाव होना है। बिहार विधानसभा के चुनाव परिणाम बिहार से राज्यसभा सांसदों के लिए काफी महत्वपूर्ण नजर आते है। बिहार में यदि महागठबंधन की जीत होती है तो जद (यू) के अध्यक्ष शरद यादव, के सी त्यागी, पवन कुमार शर्मा तथा राम शंकर प्रसाद की लाटरी खुल सकती है,  जबकि महागठबंधन की पराजय राजनीतिक मानचित्र में बदलाव कर सकती है। उत्तराखंड में भाजपा को अपनी एक मात्र सीट से हाथ धोना पड़ सकता है,  क्योंकि मौजूदा राज्यसभा सदस्य तरूण विजय का कार्यकाल 4 जुलाई 2016 को समाप्त हो  रहा है। मौजूदा राजनीतिक तस्वीर दर्शाती है कि उत्तराखंड से कांग्रेस जीत सकती है, क्योंकि वहा कांग्रेसी सरकार है। राजस्थान से राज्यसभा सांसद राम जेठमलानी का कार्यकाल 4 जुलाई 2016 को समाप्त हो रहा है और उनकी वापिसी के आसार कम नजर आते है, क्योंकि भाजपा से उनके रिश्तों में खट्टास बढ़ चुकी है, मगर फिर भी संभावना है कि उन्हें किसी अन्य राज्य से एडजस्ट किया जा सकता है।

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