रॉयल हवेली बनी पहेली: सलाहकार को सलाहकारों की सलाह


सिरसा(प्रैसवार्ता)। जिला प्रशासन, भाजपाईयों तथा आमजन के लिए रॉयल हवेली एक पहेली बनी हुई है। यह हवेली भाजपा की अनुशासन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष गणेशी लाल की है। सिरसा में भाजपा की गतिविधियां गणेशी लाल और मुख्यमंत्री हरियाणा के राजनीतिक सलाहकार जगदीश चौपड़ा अलग-अलग चलाए हुए है। परिवारवाद से मुक्त राजनीतिक शासन देेने का राग अलापने वाली भाजपा की सही तस्वीर सिरसा में देखी जा सकती है, जहां राजनीतिक तौर पर आमने-सामनेे देखे जा रहे भाजपाई दिग्गजों के बेटे भी आमने-सामने देखे जा सकते है। राज्य सरकार में भागीदारी जगदीश चौपड़ा की है, मगर सरकार के मंत्री गणेशी लाल की रॉयल हवेली में आमजन, प्रशासन तथा मीडिया से रूबरू होते है। प्रौ. लाल की रॉयल हवेली की चहल-पहल से बेचैनी पालने वाले मुख्यमंत्री हरियाणा के राजनीतिक सलाहकार चोपड़ा को सलाह दे रहे है कि वह भी कोई हवेली का जुगाड़ करें। प्रैसवार्ता को मिली जानकारी के अनुसार करीब आधा दर्जन मंत्री रॉयल हवेली में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुके है, मगर चोपड़ा कभी उनके साथ सिरसा में रहते हुए नजर नहीं आए। प्रौ. लाल तथा चौपड़ा की आंख मिचौली को लेकर आमजन की सोच में भी बदलाव आ रहा है। सिरसा के राजनीतिक मानचित्र को देखने से पता चलता है कि इस विधानसभा क्षेत्र पर अग्रवाल या पंजाबी समुदाय का ही प्र्रभुत्व रहा है। प्रौ. अग्रवाल समुदाय तथा पंजाबी समुदाय से चौपड़ा संबंध रखते है और दोनो भाजपाई दिग्गज अपने अपने समुदाय में अपना जनाधार बढ़ाते नजर आ रहे है। पिछले विधानसभा चुनाव में सिरसा क्षेत्र से भाजपा ने पंजाबी समुदाय की सुनीता सेतिया को अपना प्रत्याशी बनाया था, जो तीसरे नंबर पर रही थी। सुनीता सेतिया पूर्व मंत्री स्व. लछमण दास अरोड़ा की राजनीतिक वारिस है तथा स्वयं में प्रभावी पहचान रखती है, मगर सरकार में भागीदारी चौपड़ा की होने से इस समाज के लोगों का रूझान चौपड़ा की तरफ कहा जा सकता है। चौपड़ा की राजनीतिक कमान उनके बेटे अमन चौपड़ा के हाथ में है, तो प्रौ. लाल के बेटे मनीष सिंगला भी अपने पिता की राजनीतिक कमान संभाले हुए देखे जा रहे है। प्रदेश की राजनीति लोकसभा चुनाव में ही जाट बनाम गैर जाट की चपेट में आ गई थी, जिसका परिणाम भाजपा के लिए विधानसभा चुनाव में लाभदायक सिद्ध हुआ, क्योंकि जाट मतदाता इनैलो तथा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के चक्कर में राजनीतिक चक्कर खा गए थे। हरियाणवी राजनीति की संशोधित तर्ज पर सिरसा में भाजपाई दिग्गजों ने अग्रवाल बनाम पंजाब वर्ग का कार्ड फैंक दिया है, जिस वजह से दूसरे वर्ग भाजपा से दूरी बनाने की तरफ मुडने लगे है। भाजपाई दिग्गजों की इस कार्ड बाजी का खामियाजा का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ सकता है। हरियाणवी राजनीति साक्षी है कि आपसी कलह का सदैव नुकसान ही हुआ है। प्रौ. लाल और चौपड़ा की राजनीतिक आंख मिचौली सेे, जहां भाजपाई उलझन में है, वहीं आमजन भी इनसे आंखे चुराने लगे है, क्योंकि आंख मिलाना भारी पड़ सकता है।

No comments