बदल रही है हरियाणवी राजनीति की तस्वीर, सुरजेवाला की सक्रियता ने बढ़ाई हुड्डा की बेचैनी

सिरसा(प्रैसवार्ता)। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा करनाल में कार्यकर्ता सम्मेलन करके पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सकते में ला दिया है, जो पिछले एक वर्ष से विशेष वर्ग के नेता बनने का स्वपन पाले हुए है। हुड्डा की सोच थी कि चौटाला बंधुओं के जेल जाने के बाद इनैलो की एक विशेष वर्ग की फौज को अपने साथ मिला लेंगे, मगर ऐसा नहीं हो पाया, बल्कि इनैलो ने हरियाणा दिवस पर रोहतक में एक विशाल रैली का आयोजन कर हुड्डा के स्वपनों पर ग्रहण लगा दिया है। हरियाणवी राजनीति में जाट बनाम गैर जाट की राजनीति को जन्म देने वाले हुड्डा का हर राजनीतिक प्रयास औंधे मुंह गिरा है। शायद यहीं कारण रहा होगा कि विधानसभा चुनाव में रोहतक के मतदाताओं ने भाजपा के मनीष ग्रोवर पर विश्वास जताकर हुड्डा को गहरा जख्म दिया, जिस पर राजनीतिक मरहम लगाने के लिए हुड्डा को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री भूूपेंद्र सिंह हुड्डा तथा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। हुड्डा ने भाजपाई शासन के छक्के (6 वर्ष) के कार्यकाल को लेकर कंडेला(जींद) से सरकार विरोधी अभियान शुरू किया, तो दूसरी तरफ तंवर ने यमुनानगर से पद यात्रा का बिगुल बजा दिया। परिणामस्वरूप हुड्डा का अभियान टॉय टॉय फिस हो गया। 15 कांग्रेसी विधायकों में 14 के समर्थन के बावजूद भी हुड्डा अपनी पसंदीदा पार्टी का नेता नहीं बना सके, बल्कि उनकी विरोधी ने विधानसभा में नेता का पद प्राप्त करके हुड्डा को जोर का झटका धीरे से दिया। तंवर और हुड्डा एक दूसरे को राजनीतिक पटकनी देने का हरसंभव प्रयास करते देखे गए है। कांग्रेस हाईकमान प्रदेश में कांग्रेसी नीति की दुर्गति के लिए हुड्डा को जिम्मेवार मान रहा है। इसलिए हुड्डा की गुलाबी पगड़ी गैंग या शक्ति प्रदर्शनों पर हाईकमान कोई ध्यान नहीं दे पा रहा, बल्कि एक विशेष वर्ग का नेता बनने का चाह्वान हुड्डा को राजनीतिक झटका देते हुए सुरेेजवाला को सक्रिय कर दिया है, जिससे राज्य की राजनीति का गणित गडबड़ाने लगा है। सुरजेवाला हुड्डा सरकार में न सिर्फ प्रभावित मंत्री रहे है, बल्कि कई बार संकट मोचक बनकर हुड्डा को संजीवनी भी दे चुके है। कांग्रेस आलाकमान के बहुत करीबी रणदीप सुरजेवाला वर्तमान में राष्ट्रीय प्रवक्ता है तथा हरियाणा के लगभग सभी वर्गो में मजबूूत पकड़ रखते है। सुरजेवाला छत्तीस के आंकड़े की चपेट में कांग्रेसी दिग्गजों से दूरी बनाए रखे हुए है। सुरजेवाला की सक्रियता से हुड्डा को भारी झटका लगा है, क्योंकि पूरे प्रदेश में उन्होंने बैठके करके लोगों की नब्ज टटोली है, जिससे संकेत मिलता है कि उनके पुराने दिन लद गए है। ऐसी परिस्थिति में हुड्डा ने एक विशेष वर्ग का नेता बनने के लिए 4 नवंबर को जींद में धरना देने का कार्यक्रम बनाया है, क्योंकि रोहतकवासी उन्हें आईना दिखा चुके है। कांग्रेस की संभावित योजना मुख्यमंत्री और पार्टी प्रधान एक ही व्यक्ति नहीं होगा, पर यदि गौर न किया जाए, तो इन दोनो में से एक को मुख्यमंत्री तथा दूसरे को पार्टी प्रधान प्रयोग किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है, तो हुड्डा राजनीतिक हाशिए पर चले जाएंगे। प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर को देखते हुए हुड्डा समर्थकों ने तंवर और सुरजेवाला से तालमेल बढ़ाना शुरू कर दिया है। सुरजेवाला की स्वच्छ छवि और सुलझी सोच के साथ साथ हरियाणवी राजनीति में उसके राजनीतिक कद पर कांग्रेस आलाकमान का विश्वास प्रदेश कांग्रेस को नई दिशा दे सकता है, क्योंकि सुरजेवाला तथा तंवर की युवा पीढि़ हुड्डा की बदौलत कांग्रेस से अलविदाई लेने तथा निष्क्रिय कांग्रेसी दिग्गजों को पुन: कांग्रेसी मंच पर लाने में सक्षम कही जा सकती है।

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