सुबह डेरा सच्चा सौदा में सत्संग और शाम को ट्रेड टॉवर में हुई नामचर्चा

सिरसा(प्रैसवार्ता)। संडे का दिन लोगों के लिए खास रहा, क्योंकि इस दिन दो बार ज्ञान की अमृतवर्षा हुई। जी हां, हम बात कर रहे है उस पावन धरती की, जिसे धर्मनगरी सिरसा कहा जाता है। इस पावन नगरी में संडे के दिन डेरा सच्चा सौदा में सुबह सत्संग हुई और शाम को ट्रेड टॉवर मार्केट में नामचर्चा हुई। इसी के चलते संडे का दिन लोगों के लिए खास बन गया। डेरा सच्चा सौदा में आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए डेरा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम इन्सां ने कहा कि इंसान अपने आप पर काबू पा लेता है तो कोई परेशानी नही रहेगी। विचारों को कंट्रोल करना आसान काम नहीं है। मन-नफ्ज-शैतान जंगली घोड़े की तरह दौड़ता रहता है और काम, क्रोध, लोभ,मोह, अहंकार, माया में उलझा रहता है। मन पर कंट्रोल करना बड़ी बहादूरी है। अगर आप में गैरत अनख है तो अपनी बुराइयों से लड़कर देखों, कमजोर को दबाना या झुका देना कोई बहादूरी नही है। इंसान में मन की वजह से ज्यादा कमियां है। मन की गति बहुत ज्यादा है पल में वह आसमान में और दूसरे पल पाताल में ले जाता है। परंतु मन की गति से कई गुणा ज्यादा तेज चलने वाली चीज भी आपके अंदर है और वो है आत्मा जो उस पल में आपको भगवान की गोद में ले जा सकती है। परंतु इंसान अपनी आत्मा को गुलाम बनाए बैठा है, जैसे हाथी पर बंदर। मन से लडऩे के लिए राम का नाम अति जरूरी है। सेवा करने से खुशियां आती है लेकिन मन काबू में नहीं आता। सेवा के साथ साथ सुमिरन करोगे तो कर्म कट जाएंगे। अगर राम नाम जपते हो तो आत्मा बलवान होती है , मन के नकेल कसती है और बंदर भाग जाता है तथा हाथी एक्टिव होकर मालिक की गोद में चला जाता है। पूज्य गुरुजी ने कहा कि मन की चालों को पहचानों । मन जालिम से लडऩा बहादूरी है। मन सब पर हावी है अनपढ़ पर भी और पढ़़े लिखों पर भी। सांई मस्ताना जी ने, शाह सतनाम जी ने मन से लडऩे का बड़ा आसान तरीका बताया, तीन शब्द है जपते रहो, इससे आत्मबल बढ़ेगा और मन काबू में आएगा। पूज्य गुरुजी ने कहा कि 'जाम ए इन्सां गुरु का Ó को अगर श्रद्धा से ग्रहण करते हो तो यह भी बहुत ज्यादा असर दिखाता है, आत्मा बलवान होती है और सेवा सुमिरन में ध्यान लगता है। उन्होंने कहा कि फकीर का काम ही भगवान की औलाद का भला करना होता है। उसको फिक्र है, वो रोकता है, टोकता है,  कदम कदम पर संभाल करता है। फकीर हमेशा सच कहते हैं सच्चा राह दिखाते हैं। अगर फकीरों के वचन मान लिए जाएं तो दुख टैंशन से मुक्त होकर परमानंद से झोलियां भर जाती है। 

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