पंजाब, जहां अपने गृह क्षेत्र जाने से घबरा रहे है बादल

सिरसा(प्रैसवार्ता)। पंजाब में तेजी पकड़ रहे सिख संगठनों के विरोध के चलते बादल तथा जुनियर बादल के फरीदकोट जाने के लिए पसीने छूट रहे है। फरीदकोट जिला के ग्राम सरावां तथा नियामी वाला ग्राम में जाने के लिए उतावले बादल और जुनियर बादल के कार्यक्रम को बिगड़ती स्थिति के चलते पुलिस प्रशासन रोके हुए है, क्योंकि इन ग्रामों के किशन भगवान सिंह और गुरजीत सिंह पुलिस फायरिंग में मारे गए थे। सूत्रों के अनुसार अकाली दिग्गज तथा सरकारी तंत्र द्वारा प्रयास किए जा रहे है कि बादल बंधुओं का कार्यक्रम बनाए जाए, मगर लोगों का रोष कार्यक्रम को अंजाम देता नजर नहीं आ रहा। बादल बंधुओं की सोच है कि प्रभावित परिवारों के दुख में भागीदारी करके राज्य की स्थिति में बदलाव आ सकता है, परंतु प्रभावित परिवारों ने यह कहकर इंकार कर दिया है कि वह सदमे में है और उन्हें किसी राजसी नेता के दुख बांटने की जरूरत नहीं, क्योंकि रोष किसी भी हादसे को जन्म दे सकता है। रूपिन्द्र सिंह और जसविन्द्र सिंह की गिरफ्तारी ने फरीदकोट जिले में बादल बंधुओं के खिलाफ भारी रोष है। पंजाब सरकार ने माहौल में बदलाव लाने के लिए डिरैक्टर टैस्ट के लिए अदालत में गुहार लगाई थी, जिसे अदालत द्वारा खारिज कर दिया गया था। बादल बंधुओं के फरीदकोट के कार्यक्रम से पूर्व रूपिन्द्र सिंह तथा भूपेंद्र सिंह की रिहाई, पुलिसिया गोली में मारने वाले पुलिसिया तंत्र की गिरफ्तारी और बरगाड़ी प्रकरण के दोषियों की गिरफ्तारी का न होना एक बड़ी चुनौती है। इसी वजह से पिछले तीन सप्ताह से कोई मंत्री इस क्षेत्र में नहीं आ रहा है, जोकि सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता है। केवल इतना ही नहीं कोई भी अकाली दिग्गज बादल बंधुओं या बादल सरकार के किसी मंत्री के कार्यक्रम की जिम्मेवारी लेने को तैयार नहीं है। बादल परिवार का यह निजी संसदीय क्षेत्र ऐसे मोड पर पहुंच चुका है, जिसमें बादल बंधुओं का जाना तो दूर रहा, बादल सरकार के किसी मंत्री के लिए आसान नहीं कहा जा सकता।

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