हरियाणा, पंजाब में भी पड़ सकता है बिहार चुनाव का असर

प्रैसवार्ता न्यूज: सिरसा(मनमोहित ग्रोवर)। दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम उपरांत बिहार विधानसभा के चुनाव परिणाम ने भाजपा की बेचैनी बढ़ा दी है, क्योंकि मात्र डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में नरेंद्र मोदी का जादू टूटता दिखाई देने लगा है। बिहार के चुनाव परिणाम का असर 2017 में होने वाले पंजाब के विधानसभा के चुनाव तथा निकट भविष्य में होने वाले पंचायती तथा निकाय के हरियाणा चुनावों पर भी पड़ेगा, जोकि भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता। पंजाब में हरियाणा विधानसभा से ही भाजपा बगावती ध्वज उठाए हुए है, जबकि हरियाणा में विपक्ष कम तथा भाजपाई ही अपनी भाजपा सरकार को कोस रहे है। हरियाणा में सभी वर्ग सरकार की कार्यप्रणाली से क्रोधित है, क्योंकि भाजपा सरकार ने मात्र 1 वर्ष के कार्यकाल में किसान, मजदूर, कर्मचारी व मध्यमवर्ग के परिवारों के नाक में दम कर दिया है और प्रदेशवासी भाजपाई शासन की नीतियों से काफी तंग हो चुुके है। हरियाणा की भाजपा सरकार की सभी योजनाएं अधूरी है, सिर्फ प्रचार ही पूरा है। एक वर्ष के कार्यकाल में हरियाणा की भाजपा सरकार अफसरशाही के चक्रव्यूह से बाहर नहीं निकल सकी, जिन पर  अभी भी इनैलो तथा कांग्रेस का भूत सवार है। सबसे ज्यादा दुर्गति का शिकार किसान वर्ग है, जिन्हें न तो फसल के उचित दाम मिल रहे है और न ही जरूरत पर यूरिया खाद मिली थी।  इतना ही नहींं प्राकृतिक आपदा और बेमौसमी बारिश से भी किसान प्रभावित हुए है। बुजुर्ग महिलाएं, विधवाएं तथा विकलांग पैंशन के लिए दर-दर भटक कर भाजपाई शासन  को कोस रहे है। बिहार चुनाव परिणाम ने इनैलो को फडफडाने का अवसर दे दिया है, तो कांग्रेस को संजीवनी मिल गई है। भाजपाई दिग्गज सरकार की कार्यप्रणाली पर उंगलिया उठाने लगे है। भाजपाई सांसद धर्मवीर को पत्र  लिखकर देना पड़ा है कि उनकी अफसरशाही सुनवाई नहीं करती, जबकि भाजपाई सांसद अश्विनी चौपड़ा अक्सर सरकार पर तीखे प्रहार करने से गुरेज नहीं करते, तो सांसद राजकुमार सैनी भाजपाई शासन के लिए सिरदर्द बने हुए है। स्वास्थय मंत्री अनिल विज की बदौलत भाजपा का स्वास्थय गडबड़ाया हुआ है। स्थिति यह है कि निष्ठावान तथा वफादार भाजपाई दिग्गजों को भाजपाई शासन से स्वयं को ठगा हुआ महसूस करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। हरियाणा की भाजपा सरकार की एक वर्ष की उपलब्धियों पर बिहार चुनाव परिणाम ने ग्रहण लगा दिया है। दिल्ली के बाद बिहार चुनाव के नतीजों ने भाजपा को गहरे राजनीतिक जख्म दिए है, जिसके लिए भाजपा ने यदि अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव न किया और कार्यकर्ताओं की सुध न ली, तो हरियाणा और पंजाब के लोग भी दिल्ली और बिहार की तर्ज पर भाजपा को जोर का झटका, धीरे से दे सकते है।

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