जाट उप मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी में भाजपा

सिरसा(प्रैसवार्ता)। बिहार विधानसभा चुनाव से मिले राजनीतिक झटके से घबराई भाजपा हरियाणा में जाट वर्ग को रिझाने के लिए किसी जाट दिग्गज को उप मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी करने लगी है। गैर जाट की सीढ़ी चढ़कर सत्ता में पहुंची भाजपा हरियाणा अपने एक वर्ष के कार्यकाल में ही लोगों से दूर होती दिखाई देने लगी है। जाट वर्ग का विरोध झेल रहे खट्टर सरकार से गैर जाट भी नाखुश है। जाट वर्ग में इनैलो, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला की मजबूत पकड़ है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहचान रखते है। इनैलो की रोहतक रैली में उमड़ी भीड़ से भाजपा सकते में है, क्योंकि भीड़  में जाट वर्ग की उपस्थिति काफी ज्यादा देखी गई थी। जाट वर्ग में सेंधमारी के लिए कांग्रेस हाईकमान ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर एक कार्ड खेला था, जो एक दशक तक चौधरी रहकर भी चौधर स्थापित नहीं कर पाए, बल्कि कांग्रेस पक्षीय सोच वाले भी कांग्रेस से दूर हो गए। वीरेंद्र सिंह डूमरखां जैसे प्रभावित जाट दिग्गज कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। पूर्व मंत्री एवं जाट दिग्गज जगदीश नेहरा ने भी कांग्रेस को अलविदा कहकर प्रांतीय ध्वज उठा लिया। इनैलो की सत्ता से दूरी पार्टी में बिखराव और बगावत के चलते बनी थी, जबकि हुड्डा ने कांग्रेस को हाशिये पर ला दिया था, जिसका फायदा भाजपा को मिला। उत्तरी हरियाणा का भगवा ध्वज हरियाणा में लहराने का महत्वपूर्ण योग कहा जा सकता है, क्योंकि हुड्डा के शासनकाल में उपेक्षा का दंश इस क्षेत्र के लोगों ने ही झेला था। जाट वर्ग को आरक्षण दिलवाकर हुड्डा स्वयं को जाट नेता स्थापित करना चाहते थे, मगर माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देश ने हुड्डा की चौधर पर ग्रहण लगा दिया। रोहतक में हुड्डा को भाजपा प्रत्याशी ने राजनीतिक धूल चटा दी, जोकि हुड्डा के लिए  किसी राजनीतिक झटके से कम नहीं कही जा सकती। भाजपा ने टोहाना से जाट विधायक सुभाष बराला को पार्टी की कमान सौंपकर जाट को रिझाने का कार्ड खेला था, जोकि सफल नहीं हो पाया। भाजपा के पास जाट उप मुख्यमंत्री बनाने का एक ही रास्ता बाकी बचा है, जिस पर राजनीतिक गणित शुरू  हो चुका है। प्रदेश में बढ़ती सरकार के प्रति नाराजगी से घायल भाजपाई कोई नई तस्वीर दर्शा सकते है, ऐसी पूरी-पूरी संभावनाए नजर आने लगी है। केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र डूमरखां कह चुके है कि हरियाणा में उप मुख्यमंत्री की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह जानते है कि यदि किसी अन्य जाट को चौधर मिली, तो उन्हें राजनीतिक झटका लग सकता है।

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