जालसाजी से रक्षा मंत्रालय की करोड़ों रुपये की जमींन हड़पी

सिरसा(प्रैसवार्ता)। धोखाधड़ी से जमींन हड़पने के मामले तो अक्सर उजागर होते रहते है, लेकिन रक्षा मंत्रालय की करोड़ों रुपये की जमींन किसी ने अपने नाम करवा ली हो ऐसा शायद ही किसी ने सुना हो। सिरसा में एक शख्स ने इस नामुमकिन को मुमकिन करके वायु सेना केंद्र की आठ किले भूमि की डिग्री अपने नाम करवा ली। इस जमींन की कीमत पांच करोड़ से ज्यादा है। धोखाधड़ी का यह मामला पुलिस महानिदेशक कार्यालय पहुंचा तो डीजीपी दफ्तर ने इस मामले की जांच के आदेश देते हुए आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश सिरसा पुलिस को दिया है। धोखाधड़ी के इस मामले में तत्कालीन मीरपुर पटवारी रामप्रकाश , कानूनगो रामचंद्र व तहसीलदार अमरिंद्र सिंह की भूमिका काफी संदिग्ध है। उक्त सभी के खिलाफ आरोपो की जांच सदर थाना पुलिस ने शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार पंजाब के जालंधर के गांव भार सिंहपुर निवासी बलबीर सिंह ने मीरपुर की मुरब्बा नंबर 65 भूमि फर्जी तरीके से पहले अपने नाम करवाई और  5 सितंबर 1991 को सिरसा अदालत से इस जमींन की डिग्री अपनी पत्नी अमरजीत कौर के नाम करवा दी। इसके बाद मीरपुर निवासी गुरदेव सिंह से बलबीर सिंह ने इस जमींन पर बुआई करने की एवज में दस लाख रुपये वसूल कर लिए। जमींन के दस्वावेजों की जांच करने पर गुरदेव सिंह को पता चला कि जिस जमींन पर बुआई के लिए उससे दस लाख रुपये वसूले गए वो जमींन तो रक्षा मंत्रालय की है और वायु सेना केंद्र की जद मेें आती है। जांच में यह भी पता चला कि  बलबीर सिंह भी इस जमींन का फर्जी तरीके से पहले मालिक बना और बाद में अपनी पत्नी को इसका मालिक बना दिया। इसके अलावा मुरब्बा नंबर 65 की डिग्री करवाकर उसने मुरब्बा नंबर 69 की आठ किले से ज्यादा भूमी का इंतकाल उस समय के मीरपुर पटवारी रामप्रकाश , कानूनगो रामचंद्र व तहसीलदार अमरिंद्र सिंह से मिली भगत करके अपने नाम करवा लिया। अपने साथ हुई इस धोखाधड़ी की शिकायत गुरदेव सिंह ने 28 सितंबर को पुलिस महा निदेशक से की। पुलिस महा निदेशक कार्यालय ने सिरसा पुलिस को इस मामले की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश दिया। सदर सिरसा पुलिस इस मामले की जांच में जुट गई है। 

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