स्वास्थ्य मंत्री हरियाणा बिगाड़ रहे है सरकार का स्वास्थ्य: जो शुभ संकेत नहीं सरकार के लिए

सिरसा(प्रैसवार्ता)। महिला पुलिस अधिकारी से उलझ कर जेल पहुंच चुके स्वास्थ्य मंत्री हरियाणा अनिल विज अब फतेहाबाद की महिला पुलिस प्रमुख से उलझ चुके है और अपने राजनीतिक प्रभाव की बदौलत संगीता का तबादला करवाने में सफल हो गए है। मगर इसी सफलता के साथ उत्पन्न हो गए है कई सवालिया निशान, जो सरकार के स्वास्थ्य पर असर ड़ाल रहे है। विज का यह खेल क्या अफसरशाही को प्रभावित करेगा या फिर अफसरशाही की सोच में बदलाव आ सकता है। सरकार अफसरशाही चलाती है, यह एक कटु सत्य है। सत्ता के नशे में अफसरशाही से उलझना किसी भी सरकार या राजसी दिग्गज के लिए फायदेमंद साबित नहीं हो सकता। महिला पुलिस अधिकारी इनैलो के गढ़ कहे जाने वाले सिरसा संसदीय क्षेत्र में बखूबी अपनी ड्यूटी निभा रही थी। इस संसदीय में बखूबी अपनी ड्यूटी निभा रही थी। इस संसदीय क्षेत्र के सिरसा तथा फतेहाबाद के दो जिलों के नौ विधानसभा क्षेत्रों में से आठ पर तथा संसदीय क्षेत्र पर इनैलो का कब्जा है। फतेहाबाद तथा सिरसा के इनैलो विधायक शराब के कारोबारी है। पुलिस अवैध शराब बेचने वालों पर मामला तो दर्ज कर सकती है, मगर उनकी चौकीदारी नहीं कर सकती। विवादित डेरा सच्चा सौदा का मुख्यालय भी सिरसा में है। इसके बावजूद दोनों जिलों में उचित कानून व्यवस्था और शांतिप्रिय माहौल देने के लिए संगीता कालिया की योग्यता और सक्ष्मता की अनदेखी नहीं की जा सकती। अनिल विज इससे पूर्व भी महिला पुलिस से उलझ कर जेल जा चुके है। संगीता का जल्दबाजी  में लिया गया तबादला सरकार पर भारी पड़ सकता है, क्योंकि बगैर जांच व स्पष्टीकरण के तबादला का होना राजनीतिक निर्णय ही कहा जा सकता है। अनुसूचित आयोग का इस प्रकरण में हस्तक्षेप कर एक सप्ताह के भीतर सरकार से जवाब मांगना सरकार को उलझा सकता है। विज मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए, लेकिन मौजूदा मुख्यमंत्री की कुर्सी हिला रहे है। संगीता कालिया का तबादला जातीय रंग ले रहा है। कांग्रेस तथा दलित समुदाय संगठन व महिला संगठन संगीता कालिया के पक्ष में आ गए है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला, कांग्रेस प्रधान अशोक तंवर, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस के प्रांतीय महासचिव नवीन केडिया, हजकां सुप्रीमों कुलदीप बिश्रोई, हजकां नेता दूडाराम इत्यादि राजसी दिग्गजों ने संगीता कालिया से दुव्यर्वहार और तबादले को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। देश की प्रथम महिला अफसर, भाजपा नेत्री व दिल्ली के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद की दावेदार किरण चौधरी के साथ साथ भाजपा का एक वर्ग भी अनिल विज को आड़े हाथों लेते हुए संगीता कालिया के पक्ष में दिखाई देने लगा है। दलित तथा पिछड़ा वर्ग अनिल विज को मंत्री पद से बर्खास्त की मांग करके जातीय रंग देने की फिराक में है, तो महिला संगठन में भाजपा की मौजूदा सरकार को महिला विरोधी करार देकर सरकार को निशाने पर रखने की तैयारी में जुट गया है। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की बदौलत, जहां मुख्यमंत्री की कुर्सी हिलती दिखाई देने लगी है, वहीं सरकार का स्वास्थ्य भी गड़बड़ाने लगा है। इससे पूर्व प्रदेश में डॉ. वंदना भाटिया मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा महिला पुलिस कप्तान भारती अरोड़ा सरकार की 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं' के सही आईने देख चुकी है। हरियाणा की सरकार में बैठे मंत्री, सांसद, विधायक या भाजपाई दिग्गज बेलगाम है या फिर अफसरशाही, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, मगर एक वर्ष के कार्यकाल में भाजपाईयों का अफसरशाही से विवाद का होना शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता।

महिला अफसर और अनिल विज
स्वास्थ्य मंत्री हरियाणा अनिल विज का महिला अफसरों से भिडना कोई नई बात नहीं है। फतेहाबाद की महिला पुलिस कप्तान संगीता कालिया से पूर्व महिला पुलिस कप्तान भारती अरोडा से भिड गए थे, जिस पर भारती अरोडा ने उन्हें जेल भिजवा दिया था। मंत्री बनते ही विज तत्कालीन एसडीएम अंबाला मीनाक्षी गोयल से भिडे। नगर निगम अंबाला की महिला कमिश्रर कमलप्रीत कौर से भी विज का टकराव हो चुका है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर वंदना भाटिया की भिंडत भी अनिल विज से हो चुकी है। संगीता कालिया प्रकरण जातीय रंग ले रहा है, जो प्रदेश में स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

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