खट्टर की ईमानदारी: पड़ रही है भाजपाईयों पर भारी

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा के ईमानदार मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की ईमानदारी भाजपाई सांसद, विधायक तथा दिग्गजों पर भारी पड़ रही है, क्योंकि हरियाणा की बेलगाम अफसरशाही ने खट्टर सरकार की पारदर्शिता, भ्रष्टाचार मुक्त तथा जन हितैषी शासन देने के दावे पर ग्रहण लगा दिया है। अफसरशाही की मनमानी की बदौलत भाजपाई सांसद, विधायक तथा दिग्गज परेशानियों से जूझ रहे है और अपनी कठिनाईयों से मुुख्यमंत्री को भी अवगत करवा चुके है। मुख्यमंत्री खट्टर ने अफसरशाही से कहा भी है कि कुुछ अफसरों को जंग लग गई है, जिसकी जंग उतारने की जरूरत है। मुख्यमंत्री का संकेत उन अधिकारियों की तरफ था, जिन्होंने पिछली सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर रहकर मलाई खाई थी और मनमानी से हकुमत चलाई थी, जिनमें सरकार बदलने के बावजूद भी किसी प्रकार का बदलाव नहीं आया। अफसरशाही जानती है कि जंग उतारने की चेतावनी देने वाली लीडरशाही स्वयं दीमक की चपेट में है। अनुभवहीनता के चलते सरकार को अफसरशाही जंग लगाए जा रही है। पिछली सरकार से नाराजगी के चलते लोगों ने नगण्य जनाधार होने के बावजूद भी भाजपा को सत्ता सौंपी, मगर भाजपाई सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरी। भाजपाई शासन के एक वर्ष के कार्यकाल ने प्रदेश की ऐसी राजनीति तस्वीर पैदा कर दी है, जिसमें पूरे प्रदेश में सभी वर्गों में हाहाकार मचा हुआ देखा जा सकता है। सरकारी तंत्र ने लोगों के जन-जीवन को अस्त व्यस्त कर दिया है। एक तरफ तो महंगाई मुंह खोले हुए है, तो दूसरी तरफ टैक्सों की बढ़ौतरी तथा बिगड़ रही कानून व्यवस्था आमजन को रूला रही है। लोगों की हाहाकार से परेशान भाजपाई भी है, जिनकी कोई सुनवाई नहीं रही। ऐसे भाजपाई स्वयं को लोगों से ज्यादा दुखी मानते हुए भाजपाई शासन को कोस रहे है। सरकारी तंत्र की मनमानी ने ऐसा मानचित्र बना दिया है, जिसमें भाजपाईयों की पीड़ा देखी नहीं जाती, क्योंकि पार्टी संगठन को मजबूती देने पर जोर देती है, तो दूसरी तरफ भाजपाई स्वयं को भाजपाई स्वयं को भाजपाई कहने में शर्म महसूस करने लगे है। मुख्यमंत्री प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर और भाजपाईयों की पीडा से वाकिफ तो है, मगर कुछ कर नहीं पा रहे, बल्कि सरकारी तंत्र को चेतावनी जरूर दे देते है, जबकि सरकारी तंत्र को ऐसी चेतावनी चेते (याद) करने की आदत नहीं है।


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