कांडा बंधुओं की सक्रियता से बदल रहे है राजनीतिक समीकरण

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणवी राजनीति में सिरसा जिला की राजनीति एक विशेष पहचान रखती है, क्योंकि यहीं से प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर में बदलाव आता है। कभी तीन लाल स्व. देवीलाल, बंसीलाल तथा भजन लाल के इर्द-गिर्द घूमने वाली राजनीति अब स्व. देवीलाल परिवार तक ही सीमित होकर रह गई है, क्योंकि सिरसा जिला से संबंध रखते थे। वर्तमान सिरसा संसदीय क्षेत्र तथा इस क्षेत्र के नौ विधायकों में से आठ का संबंध चौ. देवीलाल की राजनीतिक पार्टी इनैलो से है, जबकि स्व. बंसीलाल का परिवार राजनीति में उपस्थिति जरूर दर्ज करवाए हुए है। बंसीलाल की पौत्री श्रुति चौधरी लोकसभा चुनाव में हार गई थी, जबकि मात्र पुत्रवधू किरण चौधरी तोशाम विधानसभा से विधायिका है। इसी प्रकार स्व. भजनलाल का परिवार मिया-बीवी तक ही राजनीतिक मानचित्र पर रह गया है। स्व. देवीलाल परिवार को छोड़कर स्व. बंसीलाल तथा स्व.
भजनलाल का परिवार राजनीतिक हाशिए पर पहुंच चुका है। वर्तमान में प्रदेश में भाजपा की सरकार है, जिसकी कमान भी एक लाल(मनोहर लाल खट्टर) ने संभाली हुई है, जिस पर प्रदेशवासी की नजरें लगी हुई है। हरियाणवी राजनीति के इस मौजूदा लाल ने अभी तक कोई करिश्मा नहीं दिखाया है और न ही इस लाल का परिवार कोई राजनीति ध्वज उठाए हुए है। इनैलो के गढ़ कहे जाने वाले सिरसा में विधानसभा चुनाव उपरांत पूर्व मंत्री गोपाल कांडा और उनके अनुज गोबिंद कांडा अपनी राजनीतिक पार्टी हरियाणा लोकहित पार्टी के साथ  कोप भवन में चले गए थे, क्योंकि मतदाताओं ने पूरे प्रदेश में हरियाणा लोकहित पार्टी के चुनाव चिन्ह पतंग की डोर काट दी थी, मगर मात्र एक वर्ष बाद निकाय चुनावों को देखते हुए कांडा बंधु कोप भवन से बाहर आए और इसी के साथ  ही राजनीतिक समीकरणों में तेजी से बदलाव शुरू हो गया। सिरसा की राजनीति ज्यादा समय तक पंजाबी तथा वैश्य समाज के इर्द-गिर्द ही घूम रही है। कांडा बंधुओं ने दोनो समाज के लोगों को एक प्लेटफार्म पर लाकर सिरसा की राजनीति के मायने बदल दिए। महाराजा अग्रसैन जयंति पर्व, अग्रवाल सभा पर विजयी परचम फहराने उपरांत कांडा बंधुओं ने अरोड़वंश सेवा सदन तथा अग्रवाल सेवा सदन की जिम्मेवारी उठाकर दोनो वर्गों पर ऐसा राजनीतिक जादू किया। बार एसोसिएशन सिरसा के चुनाव में दोनो समुदायों के सहयोग से बार एसोसिएशन चुनाव में विजयी परचम लहरा कर इनैलो के गढ़ में 275 वोटों से इनैलो प्रत्याशी को पराजित करने का श्रेय कांडा बंधुओं को जाता है, जिन्होंने वैश्य तथा पंजाबी समाज में दस्तक देकर एक परिपक्क राजनेता का प्रमाण दिया है। काबिलेगौर है कि बार एसोसिएशन सिरसा पर एक लंबे समय से इनैलो का ही कब्जा रहा है। कांडा बंधुओं का वैश्य तथा पंजाबी समुदाय में दस्तक देने उपरांत अगला राजनीतिक निशाना निकाय चुनाव है, जिसके लिए कांडा बंधु तैयारी में जुटे हुए है, जबकि इनैलो में कोई हलचल दिखाई नहीं देती। कांग्रेस आपसी कलह की चपेट में है, तो सत्तारूढ़ भाजपा ''टांग खींच अभियान" में व्यस्त है। ऐसी स्थिति में राजनीतिक मानचित्र कांडा बंधुओं पर आकर रूक जाता है। राजनीतिक पंडित यह मानकर चल रहे है कि बार एसोसिएशन में सेंधमारी उपरांत कांडा बंधु निकाय चुनाव को लेकर काफी गंभीर है, जो उनके राजनीतिक भविष्य की पकड़ रही गति का संदेश देती है। कांडा बंधुओं की सक्रियता ने उन चेहरों के स्वपनों पर ग्रहण लगा दिया है, जो कोप भवन में चले जाने को लेकर स्वपनों की दुनियां बनाने लगे थे।

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