भाजपा के लिए आसान नहीं है इनैलो के गढ़ में सेंध लगाना

(इनैलो तथा कांग्रेस में रहेगी पंचायती चुनाव टक्कर)
सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणा में पंचायती चुनाव का बिगुल बज चुका है और पूरे प्रदेश में पंचायती चुनावों की चहल-पहल शुरू हो चुकी है, क्योंकि इन चुनावों के परिणाम इनैलो के राजनीतिक भविष्य तय करेंगे, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा की अग्नि परीक्षा होगी, जबकि आपसी कलह से जूझ रही कांग्रेस को हरियाणा के जागरूक मतदाता आईना दिखाएंगे। सत्तारूढ़ भाजपा का फोक्स इनैलो के गढ़ कहे जाने वाले सिरसा पर रहेगा, जहां संसदीय क्षेत्र के साथ जिले की पांच विधानसभाओं पर इनैलो का कब्जा है। प्रदेश में कांग्रेस दो घड़ा में बंटी हुई है, जिसमें एक की कमान कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष अशोक तंवर के हाथ में है, तो दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की सामांतर कांग्रेस चल रही है। सिरसा जिला में हुड्डा से कहीं ज्यादा तंवर को देखा जा रहा है, जो इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके है। प्रदेश की खट्टर सरकार ने भले ही शैक्षणिक योग्यता शर्त पर विजयी परचम लहरा लिया है, मगर फिर भी जिला सिरसा में जीत की डगर भाजपा के लिए आसान दिखाई नहीं देती। भाजपा की चुनावी शर्त भाजपा पर भारी पड़ सकती है, क्योंकि एक लंबे समय से ग्राम की चौधर कर रहे चौधरियों को अपनी चौधर बरकरार रखने के लिए परिवार के पढ़े लिखे पुत्र, पुत्रवधू तथा अन्य रिश्तेदारों को चुनावी समर में उतारना पड़ रहा है। ग्रामीण आंचल में किसानों को समय पर यूरिया खाद का न मिलना, उपज के घटते दाम, बिजली-बिलों का बढ़ता आर्थिक करंट, बुजुर्गों, विकलांगों तथा विधवाओं को पैंशन न मिलने से सरकार के खिलाफ काफी गुस्सा देखा जाने लगा है। हरियाणा की भाजपा के एक वर्ष के शासनकाल में भाजपाई भी प्रसन्न नहीं है और उन्हें ग्रामीण आंचल में वोट के लिए जाना भारी हो रहा है। अफसरशाही से भाजपा कार्यकर्ता प्रसन्न नहीं है, बल्कि उनके मनोबल में भारी कमी आई है। जिला सिरसा में भाजपा के कई घड़े है, जो पूरा जोर लगाने के बावजूद भी इनैलो के गढ़ में सेंधमारी नहीं कर सकते। कांग्रेस अपने एक दशक के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों की दुहाई दे रही है, वहीं भाजपा ने एक वर्षीय कार्यकाल को निशाने पर रखा हुआ है, जबकि इनैलो का अपना वोट बैंक है, जिसमें कोई भी राजनीतिक दल सेंधमारी करने में सक्षम नजर नहीं आता। ग्रामीण आंचल में भाजपा को किसानों की नाराजगी झेलनी पड़ेगी,इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। भाजपा की शैक्षणिक योग्यता शर्त को भी ग्रामीण आंचल में उचित नहीं माना जा रहा। निकट भविष्य में होने वाले पंचायती चुनाव के क्या परिणाम रहेंगे, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, मगर इनैलो के गढ़ में सेंधमारी करना भाजपा के लिए आसान नहीं नजर आ रहा।


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