सरकार को घेरते-घेरते खुद घिरे भूपेंद्र हुड्डा

सिरसा(प्रैसवार्ता)। पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र हुड्डा सत्ता से दूर क्या हुए, कि परेशानियों की बाढ़ आ गई। अपनों में घिरे हुड्डा ने सरकार को घेरने की डुगडुगी बजाई कि भाजपा सरकार ने डुगडुगी सहित हुड्डा को घेरे में ले लिया। एक दशक तक हरियाणा में शासन करके हुड्डा ने अपनों को ही, जो राजनीतिक जख्म दिए, अब उन पर भारी पड़ रहे है। एक विशेष वर्ग का चौधरी बनने की योजना की हवा निकलते ही भूपेंद्र हुड्डा का हर राजनीतिक कदम फेल होता देखकर भाजपाई शासन ने हुड्डा को चपेट में लेने की योजना पर अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है, क्योंकि भाजपाई सरकार जानती है कि हुड्डा की गृह चाल ठीक नहीं है। औद्योगिक प्लाट आंबटन घोटालों की सीबीआई जांच ने भूपेंद्र हुड्डा की परेशानी काफी बढ़ा दी है, क्योंकि इस घोटाले की विजीलेंस जांच उपरांत मामला सीबीआई तक पहुंच चुका है। औद्योगिक प्लाटों की बंदरबांट में हुड्डा के नजदीकियों को ही औने-पौने दामों  पर प्लांट आवंटित किए गए है। भाजपा ने सत्ता में आते ही इन घोटालों की जांच के आदेश दिए थे। जांच उपरांत सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित तीन अन्य अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करवाई गई। इससे पूर्व इनैलो के सीडी प्रकरण में हुड्डा सरकार में सीपीएस रहे राम किशन फौजी सहित पांच पूर्व विधायकों पर मुकद्दमा दर्ज करने पर मुकद्दमा दर्ज करने के लोकायुक्त द्वारा आदेश दिए जा चुके है। नैशनल हैराल्ड मामले में भी भूपेंद्र हुड्डा विवादों में घिर चुके है। भूपेंद्र हुड्डा को डाऊन करने के लिए मौजूदा भाजपा सरकार के अतिरिक्त इनैलो तथा कांग्रेस का एक वर्ग भी सक्रिय है। भूपेंद्र हुड्डा की बढ़ रही राजनीतिक सक्रियता और सरकार के विरूद्ध धुंआधार बैटिंग के चलते भाजपा सरकार ने हुड्डा पर शिकंजा कसना जरूरी समझते हुए पहल कर दी है। भूपेंद्र हुड्डा को घिरते देखकर उनके अपनों ने भी स्वयं को दूर रखना उचित समझते  हुए दूरी बढ़ानी शुरू कर दी है, जबकि कुछ हुड्डा के राजनीतिक विरोधी अशोक तंवर के संपर्क में बताए जाते है, क्योंकि कांग्रेस में रहकर उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य तंवर की छत्रछाया में ही उज्जवल नजर आता है।

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