नया साल हरियाणवी राजनीति में लाएगा उबाल: पतंग भी पकड़ेगा उड़ान

सिरसा(प्रैसवार्ता)। हरियाणवी राजनीति में नए वर्ष को एक राजनीतिक उबाल देखने को मिलेगा, जो राज्य की राजनीति के समीकरणों में उथल-पुथल पैदा करेगा। हरियाणा में भाजपा की सरकार है, इनैलो प्रमुख विपक्षी दल है, तो कांग्रेस दो घड़ों में अपनी राजनीतिक गतिविधियां चलाए हुए है। प्रदेश में पंचायती चुनावों की डुगडुगी बज चुकी है, जबकि शहरी निकाय चुनावों की पंचायती चुनाव उपरांत होने की संभावना है। पंचायती तथा शहरी निकाय चुनावों की पंचायती चुनाव होने की संभावना है। पंचायती तथा शहरी निकाय चुनावों को देखते हुए हरियाणा लोकहित पार्टी(हलोपा) ने सक्रियता बढ़ा दी है, जबकि आम आदमी पार्टी(आप) का जनाधार बढऩे की बजाए कम हुआ है। हलोपा सुप्रीमों गोपाल कांडा पूर्व गृह राज्यमंत्री तथा उनके अनुज गोबिंद कांडा विधानसभा चुनाव में सिरसा तथा रानियां क्षेत्र से चुनाव लड़कर दूसरे नंबर पर रहे है, जबकि विनोद शर्मा पूर्व केंद्रीय मंत्री ने हरियाणा जन चेतना पार्टी बनाकर स्वयं तथा अपनी धर्मपत्नी के साथ पराजय को स्वीकार किया था। कांडा तथा शर्मा दोनो को पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र हुड्डा का विश्वसनीय माना जाता है, जिन्होंने अपनी अपनी अलग-अलग पार्टी बनाकर कांग्रेस को जबरदस्त राजनीतिक झटका दिया था। इसी झटके का ठीकरा कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व अब तक भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर फोड़े हुए है। विधानसभा चुनाव में लुढ़कने के बाद कांडा बंधु तथा विनोद शर्मा कोप भवन में चले गए थे, मगर पंचायती चुनाव की डुगडुगी ने हलोपा को चुनावी मैदान में सक्रिय कर दिया है, जबकि विनोद शर्मा अब तक चुप्पी साधे हुए है। कांडा तथा शर्मा दोनो ही इलैक्ट्रॉनिक तथा प्रिंट मीडिया में पैर पसारे हुए है और मीडिया की सीढ़ी चढ़कर हरियाणवी राजनीति में उथल-पुथल की सोच रखते है। गासेपाल कांडा की राजनीतिक सोच ने फिर 'पतंग'(हलोपा का चुनाव चिन्ह) उड़ाना शुरू कर दिया है। महाराजा अग्रसैन जयंति में कांडा बंधुओं को मिले समर्थन ने उन्हें संजीवनी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक कांडा बंधु निकट भविष्य में अपनी फोक्स सिरसा, फतेहाबाद तथा हिसार जिले तक ही रखेंगे और धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में अपना नेटवर्क स्थापित करेंगे। प्रदेश में विधानसभाई चुनाव करीब चार वर्ष बाद होने है, तब तक कांडा बंधुओं का पतंग हरियाणवी राजनीति में प्रभावी पहचान दे सकता है। कांडा बंधुओं को हुड्डा के समर्थकों का भी साथ मिल सकता है, क्योंकि भूपेंद्र हुड्डा के कांग्रेसी नेतृत्व में ग्रह ठीक नहीं चल रहे। गोपाल कांडा के करीबी मानते है कि राजनीति में कांडा बंधु इनैलो की तर्ज पर पूरे प्रदेश में अपनी फौज तैयार करेंगे और नववर्ष के आगमन के साथ ही प्रदेश में पतंग उड़ती दिखाई देगी। कांडा हलोपा को गैर जाट की राजनीतिक तस्वीर दर्शाएंगे, क्योंकि प्रदेश का गैर जाट हजकां से तो दूर जा चुका है, जबकि मौजूदा भाजपाई से खुश नहीं है, जिसका राजनीतिक लाभ हलोपा को मिल सकता है। कांडा बंधु प्रदेश की राजनीति में क्या नई उथल पुथल मचाएंगे, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, मगर कांडा की भावी राजनीतिक सोच से सत्तारूढ़ भाजपा सकते में आ गई है, तो कांग्रेस को भी अपनी रणनीति में बदलाव के लिए मजबूर कर दिया है। 'पतंगÓ नववर्ष से कितनी उड़ान भरता है, पर हरियाणवी राजनीति की नजरें रहेंगी, मगर इतना जरूर कहा जा सकता है कि कांडा बंधुओं की सक्रिय राजनीति से प्रदेश की राजनीति में हलचल जरूर मचेगी।

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