सस्ती लोकप्रियता हासिल करने वाले कर रहे है डेरा सच्चा सौदा को बदनाम: प्रवक्ता - The Pressvarta Trust

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Monday, January 18, 2016

सस्ती लोकप्रियता हासिल करने वाले कर रहे है डेरा सच्चा सौदा को बदनाम: प्रवक्ता

संत गुरमीत राम रहीम इन्सां 
प्रैसवार्ता न्यूज: सिरसा(मनमोहित ग्रोवर)। उनका बॉलीवुड वाला सुपर मसाला स्टाइल है। कार हो या फिर मोटर बाइक हर तरह की सवारी का उन्हें शौक है और इसीलिए कभी वो हाथी पर सवार हो जाते हैं तो कभी उनके पैर साइकिल के पैडल पर कदम ताल करते नजर आते हैं। आज हम यहां बात कर रहे है डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम इन्सां पर, जिन पर भगवान विष्णु की नकल का आरोप लगाया जा रहा है। डेरा सच्चा सौदा के प्रवक्ता ने प्रैसवार्ता को बताया कि भगवान विष्णु की नकल का आज जो आरोप डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम पर लगाया जा रहा है यह सन् 2009 में रिलीज हुई 'शंखनाद' एक म्यूजिक एलबम का हिस्सा है, जिसमें सोंग (गाना) के अनुरुप यह वेशभूषा है। इसमें कहीं भी भगवान विष्णु जी की नकल नहीं है। गुरु जी ने न तो नकली बाजुएं लगाई हैं और न ही क्लीनशेव है। गुरु जी की लम्बी दाढ़ी है जो किसी भी प्रकार से विष्णु जी से मेल नहीं खाती। 


टीवी सीरियलों में किया जाता है देवी देेवताओं का अभिनय, कहीं कोई आपत्ति नहीं
डेरा सच्चा सौदा के प्रवक्ता ने कहा कि आजकल टीवी सिरियल में जैसे हनुमान, महादेव, महाभारत, सिया के राम, कर्ण,  रामायण इत्यादि अनेक एेसे सीरियल हैं जिनमें भगवान राम, सीता, भगवान कृष्ण, हनुमान, ब्रह्मा, विष्णु, महेश इत्यादि देवी-देवताओं का अभिनय किया जाता है। जिस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होती। लेकिन गुरू जी ने तो एेसा भी नहीं किया। यह सब सस्ती लोकप्रियता हासिल करने व डेरा सच्चा सौदा को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है। 

ऐसे मिली थी संत गुरमीत राम रहीम को गद्दी
बता दें कि संत गुरमीत राम रहीम का जन्म श्रीगंगानगर जिले के गुरुसर मोडिया गांव में सन 1967 को एक जमींदार परिवार में हुआ था। 5 साल की उम्र में संत गुरमीत राम रहीम पहली बार डेरा सच्चा सौदा के दूसरे गुरु शाह सतनाम सिंह जी के संपर्क में आए थे। सूत्रों की मानें, तो संत गुरमीत राम रहीम 1972 में पहली बार सिरसा हरियाणा आए थे और उनके ननिहाल से पहले कुछ लोगों ने गुरुमत्र लिया हुआ था। पांच साल के बाबा राम रहीम की गुरु सतनाम सिंह से मुलाकात का ये सिलसिला फिर कभी थमा नहीं। सात साल की उम्र से ही वे ट्रैक्टर चलाने लगे थे। धीरे- धीरे उनकी संत सतनाम सिंह जी से करीबियत बढ़ती चली गई और फिर एक दिन अचानक गुरु सतनाम सिंह जी ने बाबा राम रहीम को अपनी गद्दी सौंपने का ऐलान कर दिया।

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