जिला कांग्रेस की प्रधानगी: विक्रमजीत सिंह एडवोकेट की खुल सकती है लाटरी

सिरसा(प्रैसवार्ता)। राजस्थान, पंजाब की सीमा से सटा जिला मुख्यालय सिरसा प्रदेश की राजनीति में एक विशेष पहचान रखता है, मगर कांग्रेेस तथा सत्तारूढ़ भाजपा अभी तक इस जिले को जिला प्रधान नहीं दे पाई है। संसदीय क्षेत्र सिरसा तथा जिले के पांच विधानसभाई क्षेत्रों पर इनैलो का कब्जा है। सत्तारूढ़ भाजपा अपने ही दो दिग्गजों की आंख मिचौली की चपेट में है, जिस कारण जिला प्रधान का पद किसी को भी नहीं मिल पाया है, जबकि इस पद की प्राप्ति के लिएआधा दर्जन से ज्यादा भाजपाई कतार में हैै। कांग्रेस ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले है, जबकि कांग्रेस में भी प्रधानगी के लिए कई चेहरे प्रयासरत् है। प्रदेश कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेंद्र सिंह हुड्डा तथा मौजूदा प्रधान अशोक तंवर के राजनीतिक प्रेम से घायल है, जबकि सिरसा में तंवर का ही बोलबाला है, जिससे संकेत मिलता है कि सिरसा की प्रधानगी तंवर के ही पंसदीदा के हाथ लगेगी। इधर तंवर भी इसी फिराक में है कि उन्हें ऐसा चेहरा मिल जाए, जो हो उनका और हुड्डा खेमा उस पर कोई टिप्पणी न कर सके। तंवर की इस सोच पर विक्रमजीत सिंह एडवोकेट खरा उतरते है, जो न सिर्फ पुराने कांग्रेसी है, बल्कि शिक्षित होने के साथ साथ मधुरभाषी व आर्थिक रूप से संपन्न है। केवल इतना ही नहीं, विक्रमजीत सिंह एडवोकेट जातीय समीकरणों में भी अन्य दावेदारों पर भारी पड़ते नजर आते है। विक्रमजीत सिंह की स्थाई रिहाईश भी है। सिख बाहुल्य जिला सिरसा में विक्रमजीत को सौंपी गई कमान कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो सकती है, ऐसी कांग्रेसीजनों की सोच है। प्रधानगी की दौड़ में लादूराम पुनिया, रमेश भादु तथा भूपेश मेहता भी है। पूनिया तथा भादू की सिरसा में स्थायी रिहाईश नहीं है, तो भूपेश मेहता विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की मदद न करने पर कांग्रेस की 'डीÓ कैटेगरी में चले गए है। भादू सिरसा सो करीब 50 किलोमीटर दूर ऐलनाबाद तथा पूनिया करीब 20 किलोमीटर दूर ग्राम बकरियांवाली में स्थायी निवास रखते है। जिला सिरसा के राजनीतिक मानचित्र में विक्रमजीत सिंह का पलड़ा काफी भारी दिखाई दे रहा है।


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