डर्टी पॉलिटिक्स के चलते जातीय तनाव की चपेट में हरियाणा - The Pressvarta Trust

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Friday, February 26, 2016

डर्टी पॉलिटिक्स के चलते जातीय तनाव की चपेट में हरियाणा

सिरसा(प्रैसवार्ता)। डर्टी पॉलिटिक्स की बदौलत हरियाणा प्रदेश में करीब 34 हजार करोड़ रूपए की क्षति होने का अनुमान है। वहीं जातीय ताव की चपेट में प्रदेश देखा जाने लगा है। शांतिप्रिय व विकासशील प्रदेशों की कतार की तरफ तेजी से बढ़ रहे हरियाणा को जाट आरक्षण आंदोलन ऐसे गहरे घाव दे गया है, जिनकी जल्द भरपाई होती दिखाई नहीं देती। लोग देश के विभाजन में हुई हिंसा, आगजनी को तो भुला गए थे, मगर यह दर्द भुला पाना आसान नहीं है, क्योंकि ये गहरा दर्द अपनों ने ही दिया है। डर्टी पॉलिटिक्स के चलते बिगड़े हुए प्रदेश के माहौल में समस्त हरियाणवियों की साख को गहरा झटका लगा है, जिसमें कई महिलाओं का सिंदूर उजड़ गया, तो कईयों की कोख सुनी हो गई। अनेक कारोबारियों के कारोबार अग्रि की भेंट चढ़ा दिए गए, तो कई घरों के चिराग भी बुझा दिए है। अब झुलसे हुए हरियाणा में शायद ही कोई निवेश करने की हिम्मत करें। हरियाणा की मौजूदा सरकार ने उन लोगों के विश्वास को भी चकनाचूर कर दिया है, जो हरियाणा में अपना कारोबार स्थापित करने का मन बनाए हुए थे। हरियाणा के सामाजिक ताने-बाने में आई खट्टास शुभ संकेत नहीं कही जा सकती, क्योंकि इस आंदोलन में उपजी जाट गैर जाट की डर्टी पॉलिटिक्स ने हरियाणवी भाईचारे की मिसाल को तहस-नहस करके रख दिया है। प्रदेश का इतिहास साक्षी है कि पिछले कई समय से प्रदेशवासियों के परिश्रम से हरियाणा की ऐसी छवि बनी थी कि सबसे सुरक्षित मानकर विदेशी और देश के बड़े बड़े औद्योगपति अपना कारोबार हरियाणा में करने लगे थे। देश विदेश के उद्योगपतियों ने बड़े बड़े शोरूम गुडग़ांव, फरीदाबाद, रोहतक व सोनीपत में स्थापित कर अपनी दस्तक दे दी थी, मगर इस आंदोलन ने उनके सुनहरी सपनों पर ग्रहण लगा दिया है। विकास की तरफ तेजी से बढ़ रहे इस प्रदेश को डर्टी पॉलिटिक्स की राह पर लाकर खड़ा कर दिया है। सरकार और अफसरशाही की लापरवाही, पुलिस तंत्र का इस मामले में फेल होना तथा राजनीतिक रोटियां सेंकने तथा सत्ता पक्ष से जुड़े एक विशेष वर्ग की रहस्यमयी चुप्पी की वजह से  हरियाणा को इस स्थिति में पहुंचा दिया गया है, जिसे पटरी पर लाना आसान नहीं होगा। जाट गैर जाट की डर्टी पॉलिटिक्स की चपेट में आ चुके हरियाणवी राजनीति भविष्य में क्या रंग दिखाएगी, यह तो आने वाला समय ही बता पाएगा, मगर डर्टी पॉलिटिक्स ने प्रदेश को बर्बादी के कगार पर खड़ा करने के साथ साथ आपसी भाईचारे के ताने-बाने को तार-तार करते हुए जातीय तनाव को जन्म देकर हरियाणा के माथे पर कलंक लगा दिया है।

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