भूपेंद्र हुड्डा की तिलमिलाहट से नई पार्टी के गठन के आसार

सिरसा(प्रैसवार्ता)। सत्ता से दूरी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को एक ऐसे राजनीतिक चक्रव्यूह की चपेट में ले लिया है, जिसके चलते भूपेंद्र हुड्डा को निरंतर राजनीतिक झटकों को झेलना पड़ रहा है। सत्तारूढ़ भाजपा ने भूपेंद्र  हुड्डा के कार्यकाल की फाईल खोल दी है, वहीं इनैलो के राजनीतिक प्रहार भी बढ़ गए है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर आरोपों में घिरे भूपेंद्र हुड्डा को लेकर रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए है, जबकि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व कोई तव्वजों नहीं दे रहा। जाट बनाम गैर जाट  की राजनीति की चपेट में आ चुकी हरियाणवी राजनीति में एक विशेष वर्ग की 'चौधर' हथियाने के लिए भूपेंद्र हुड्डा का प्रयास सफल न हुआ। गैर जाटों में सेंधमारी की योजना बना रहे भूपेंद्र हुड्डा को उस समय गहरा झटका लगा, जब उनके राजनीतिक सलाहकार प्रौफेसर वीरेंद्र का जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर  एक ऑडियो वायरल हो गया, जिसमें आंदोलन को भड़काने के लिए कहा गया। प्रौ. वीरेंद्र पर देश द्रोह का मामला भी दर्ज हुआ और उसे दस दिन तक पुलिस रिमांड में रहना पड़ा। जाट आरक्षण आंदोलन में प्रदेश में, जहां भारी क्षति हुई, वहीं भूपेंद्र हुड्डा के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्र चिन्ह लग गया। हरियाणा में अपने मुख्यमंत्रीकाल के दौरान गैर जाटों में हुड्डा ने, जो 'ईमेजÓ बनाई थी, उसे बिगाडऩे के लिए उनके अपनों तथा विरोधियों ने सक्रियता बढ़ा दी है, जिससे भूपेंद्र हुड्डा बैचैन हो उठे है। चारों तरफ से राजनीतिक झटके खा रहे भूपेंद्र हुड्डा ने राजनीतिक हमलावर रूख अपनाते हुए मौजूदा भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठवाकर प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। भूपेंद्र हुड्डा को जाटों के साथ गैर जाटों की नाराजगी का निरंतर सामना करना पड़ रहा है। सत्तारूढ़ भाजपा व इनैलो प्रदेश में हुए हिंसक उपद्रव का ठीकरा भूपेंद्र हुड्डा पर तोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसके प्रति गंभीर नहीं दिखाई दे रही। आरोपों की बौछार से से तिलमिलाए भूपेंद्र हुड्डा क्या नया राजनीतिक दल बनाने की सोच रहे है, को लेकर क्यासों का दौर शुरू हो गया है। भूपेंद्र हुड्डा के करीबी सूत्रों के अनुसार कोई नई राजनीतिक पार्टी नहीं बनाई जा रही और न ही हुड्डा खट्टर सरकार, इनैलो तथा अपनों की बयानबाजी से चिंतित है। भूपेंद्र हुड्डा के राजनीतिक भविष्य को लेकर हरियाणवी राजनीतिक में क्यासों की बाढ़ आ गई है।

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