उम्मीद छोडऩे वाला रूहानियत से दूर हो जाता है: संत गुरमीत - The Pressvarta Trust

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Sunday, April 3, 2016

उम्मीद छोडऩे वाला रूहानियत से दूर हो जाता है: संत गुरमीत

प्रैसवार्ता न्यूज, सिरसा(मनमोहित ग्रोवर)। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत डॉ. गुरमीत राम रहीम इन्सां ने कहा कि सत्संग में जब इंसान चलकर आता है तो वह अपने कर्मों, भयानक मुश्किलों से छुटकारा पा लेता है। सत्संग में आना बहुत बड़ा कदम है, सत्संग में आना छोटी बात नहीं है। मन रोकता है, मन मत्ते लोग रोकते हैं। बाहर वाले रोकते हैं, घर वाले रोकते हैं लेकिन मालिक के आशिक किसी की परवाह नहीं करते। वे रविवार सुबह शाह सतनाम जी धाम में सत्संग के दौरान आए हुए श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि  जिन्हें सतगुरु, अल्लाह, राम से प्यार हो जाता है वो किसी भी कीमत पर अपने इश्क को हासिल कर लेते हैं। सतगुरु, अल्लाह, राम , मालिक के प्यार में चलने वाले किसी की परवाह नहीं करते। 'अग्गे नू बढ़ा के पैर, पीछे नू हटाउना की, बन के प्रेमी फेर दिल नू डुलावना की।Ó अगर आप यही वचन मान लो तो आपको कोई गम, चिंता, टैंशन नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि उम्मीद कभी ना छोड़ो, जिस दिन आदमी उम्मीद छोड़ देता हे वो रूहानियत से दूर होता चला जाता है। उन्होंने कहा कि अल्लाह-वाहेगुरु-राम पूर्ण है, अजर-अमर है और जर्रे जर्रे में रहने वाला है, नजर उसे ही आएगा, जो उसकी याद में समय लगाएगा। पूज्य गुरुजी ने कहा कि दुनियां के सब सहारे फानी है और मालिक का प्यार लासानी है। सतगुरु, अल्लाह, राम कभी किसी को नहीं छोड़ता, जो मालिक के प्यार में चलते हैं, सतगुरु उसके सारे गम-चिंता को समाप्त कर देता है, खुशियों से मालामाल कर देता है परंतु वो आजमाता भी है कि बर्तन उसकी दया-मेहर पाने के काबिल भी है या नहीं। सुमिरन-सेवा से बर्तन तैयार होता है और चुगली, निंदा और बुराइयों से बर्तन कमजोर होता है। जीव जब बुराइयों में फंस जाता है तो मालिक की रहमत मिलना भी हो जाती है। जब जीव मालिक की भक्ति करता है, और मालिक पर छोड़ता है , तो कोई उसका बाल भी बांका नहीं कर सकता। हौंसले बुलंद और दृढ़ यकीन रखना चाहिए। लगातार सिमरन भक्ति करते रहो तो उसकी दया-मेहर जरूर बरसेगी। अच्छे कर्म करो, अच्छे लोगों की सोहबत करो, भक्ति इबादत करो तो रहमत से मालामाल हो जाओगे। सत्संग के दौरान डेरा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम इन्सां ने 8014 लोगों को गुरुमंत्र, नामशब्द की दीक्षा प्रदान कर उन्हें बुराइयां त्यागने का संकल्प करवाया। इस अवसर पर सादगी पूर्ण ढंग से चार शादियां हुई।

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