हजकां के कांग्रेस में विलय से हरियाणा में राजनीतिक 'कां-कां' शुरू - The Pressvarta Trust

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Saturday, May 14, 2016

हजकां के कांग्रेस में विलय से हरियाणा में राजनीतिक 'कां-कां' शुरू

सिरसा(प्रैसवार्ता)। आपसी कलह से जूझ रही हरियाणा कांग्रेस में हजकां विलय से न तो कांग्रेसी प्रसन्न नजर आ रहे है और न ही हजंकाई के चेहरों पर मुस्कान है। प्रदेश कांग्रेस पहले तंवर और भूपेंद्र हुड्डा के खेमे में बंटी हुई थी, मगर अब हजकां सुप्रीमों कुलदीप बिश्रोई का खेमा भी दिखाई देने लगा है। तीसरे खेमे की आमद से कांग्रेस को फायदा कम नुकसान ज्यादा रहेगा, क्योंकि हजकांई उन विधानसभाई क्षेत्रों में सेंधमारी करेंगे, जहां हजकां या उनका प्रभाव है और इस सेंधमारी से वह कांग्रेसी दिग्गज राजनीतिक तौर पर घायल होंगे, जिनके विधानसभा क्षेत्र में सेंधमारी हुई होगी। हरियाणवी राजनीति में घायल राजसी दिग्गज 'जोर का झटका धीरे सेÓ देने में निपुण कहे जाते है। पति-पत्नी तक सिमट चुकी हजकां के लिए कांग्रेस आदमपुर तथा हांसी टिकट दे सकती है, जबकि एक दर्जन विधानसभाई क्षेत्रों में हजकांईयों को टिकट देने पर कांग्रेस में बगावत के आसार बढ़ेंगे और यहीं बगावत कांग्रेस पर भारी पड़ेगी। हजकां सुप्रीमों कुलदीप बिश्नोई अपने भाई चंद्रमोहन व दूडाराम के साथ साथ अपने ज्यादा से ज्यादा समर्थकों को टिकट दिलवाने का हरसंभव प्रयास करेंगे, वहीं कांग्रेस दिग्गज विरोध पर उतरेंगे। हजकां से अलविदाई लेकर कांग्रेस से बने उन पांचों विधायकों का बिश्रोई विरोध करेंगे। केवल इतना ही नहीं, कांग्रेस को छोड़कर  हजकां में शमिल होने वाले तथा विधानसभा चुनाव में  कांग्रेस प्रत्याशियों का विरोध करने वाले हजकांई अब उलझन में है, क्योंकि कांग्रेस से विश्वासघात कर हजकांई बने राजसी दिग्गजों के साथ हजकां सुप्रीमों कुलदीप बिश्रोई ने विश्वासघाती चुंबक का प्रयोग करके उन्हें ऐसे मोड पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां  'आगे कुआं-पीछे खाईÓ हैं। हजकां सुप्रीमों कुलदीप बिश्रोई ने अपने राजनीतिक चाबुक से कितने राजसी दिग्गजों को हजकां से बाहर कर उनके राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान लगाए थे, जग जाहिर है। हजकां सुप्रीमों पर विश्वास करने वाले राजसी दिग्गज उलझन में है, क्योंकि घर वापिसी उन्हें रास नहीं आ रही। ऐसे राजसी दिग्गजों की राजनीतिक स्थिति को भांपते हुए भाजपा ने उन पर डोरे डालने शुरू कर दिए है। कुलदीप बिश्रोई के विश्वासघाती चुंबक से घायल राजसी दिग्गज अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित है और चिंतित राजसी दिग्गज का 'हृदय परिवर्तन' हरियाणवी राजनीति में मान्य  रहा है। प्रदेश में आम आदमी पार्टी की दस्तक के कारण राजनीतिक प्लेटफार्म अभी खाली है, जहां उपस्थिति दर्ज करवाकर चुनावी भाग्य अजमाया जा सकता है। हजकां के कांग्रेस में विलय से कांग्रेस का एक बड़ा वर्ग खफा बताया जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस का तीसरा खेमा कांग्रेस के राजनीतिक भविष्य पर ग्रहण लगा सकता है। हजकाईयों की सोच है कि इनैलो से कांग्रेस में शामिल हुए दो पूर्व विधायकों को कांग्रेस प्रधान अशोक तंवर ने अमान्य मानते हुए आईना दिखा दिया है। उन्हें अशोक तंवर का नेतृत्व स्वीकार करना होगा, क्योंकि हजकां सुप्रीमों ऐसा कर चुके है। हजकां सुप्रीमों कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस में शामिल होकर अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित कर चुके है, जबकि हजकाईयों के राजनीतिक भविष्य को दाव पर लगा दिया है। कुलदीप बिश्रोई द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से राजनीतिक मतभेद के चलते हजकां का गठन करना व हजकां द्वारा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को तीसरे नंबर पर लाया जाना कांग्रेस अभी भूली नहीं है, क्योंकि लगभग दर्जन विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस की विजय में हजकां बाधक रही है और हजकांईयों की बदौलत विधानसभा में न पहुंचने वाले कांग्रेसी दिग्गजों के हजकां के कांग्रेस में विलय से राजनीतिक जख्म फिर से हरे हो गए है, जिन्हें कांग्रेस के लिए शुभ नहीं कहा जा सकता।

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