ये है भारतीय राजनीति के चमकते कुंवारे राजसी सितारे

सिरसा(प्रैसवार्ता)। भारतीय राजनीति में बढ़ रहे परिवारवाद को देखते हुए जागरूक मतदाताओं ने कुंवारों को तव्वजों देनी शुरू कर दी है। असम में हुए विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने सर्वानन्द सोनोवाल पर विश्वास व्यक्त किया है, जोकि कुंवारे है। असम की तरह हरियाणा में पहली बार स्पष्ट बहुमत से बनी भाजपाई सरकार के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी कुंवारे है। पश्चिमी बंगाल में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनी ममता बनर्जी अविवाहित है, वह तामिलनाडू की मुख्यमंत्री जयललिता भी इस श्रेणी में आती है। बसपा के संस्थापक रहे स्व. मान्यवर कांशी राम भी कुंवारे थे तथा वर्तमान में बसपा सुप्रीमों मायावती ने भी शादी नहीं रचाई है। संसदीय क्षेत्र सिरसा से प्रतिनिधित्व कर चुकी वर्तमान राज्यसभा सदस्य सुश्री सैलजा भी कुंवारी है। देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छोटी आयु में विवाह तो हुआ था, मगर उन्होंने एकाकी जीवन ही लिया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी अविवाहित है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, समाजवादी नेता स्व. राम मनोहर लोहिया, ओडि़सा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, केंद्रीय मंत्री उमा भारती, कुशा भाई ठाकरे, जे पी ठाकुर, नाना जी देशमुख, का. इंद्रजीत गुप्त इत्यादि ऐसे राजसी चेहरे है, जिनमें से कुछ का तो निधन हो चुका है, जिन्होंने शादी नहीं रचाई। देश का राजनीतिक इतिहास साक्षी है कि इन चिर-कुंवारे राजसी दिग्गजों ने समाजसेवा की है। देश व प्रदेश में राजसी चौधर बढ़ रहे कुंवारों के आंकड़ों को देखते हुए राजसी चेहरों ने अपने राजनीतिक भविष्य के लिए अविवाहित रहने को ही प्राथमिकता देनी शुरू कर दी है। कुंवारों के प्रति देशवासियों की बन रही सोच के चलते परिवारवाद पर अंकुश लगने के आसार नजर आने लगे है।

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